त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर नेताओं की भागदौड़ तेज हो गई है। कोई क्षेत्रों के आरक्षण का गणित लगा रहा है तो कोई मतदाता सूची में वोटरों के नाम कटवाने व जोड़वाने में पसीना बहा रहा है। वहीं, नए परिसीमन पर चुनाव लड़ने की आस लगाए नेताओं की मंशा पर भी सोमवार को पानी फिर गया, क्योंकि उच्च न्यायालय ने नए परिसीमन पर चुनाव कराने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है।
मौजूदा समय चहुंओर पंचायत चुनाव की खिचड़ी पक रही है। कहीं हाल में हुए रैपिड सर्वे को आधार मानकर क्षेत्रों के आरक्षण का गुणा-भाग लगाया जा रहा तो कहीं पिछले दो चुनाव में मतदाताओं के रुझान को लेकर प्रत्याशियों के चयन पर बहस छिड़ी हुई है।
जिले में कुल 1054 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन के दौरान 178 नई ग्राम पंचायतों का गठन हुआ था। लेकिन शासन और निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्य के तहत यहां पंचायतों के गठन और परिसीमन की प्रक्रिया पर ग्रहण लग गया था। परिसीमन का मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया।
जिले में हुए नए परिसीमन पर चुनाव कराने को लेकर उच्च न्यायालय में शांति देवी ने याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर आपत्ति लगाते हुए रामउदार वर्मा, डॉ. प्रमोद पांडेय, प्रेम नरायन पांडेय ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।
मांग की थी कि राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश को कायम रखा जाए और पुराने परिसीमन के आधार पर चुनाव संपन्न कराया जाए। सोमवार को उच्च न्यायालय ने नए परिसीमन पर चुनाव कराने को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दी है।
भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि शासनादेश के अनुसार ग्राम, जिला व क्षेत्र पंचायतों के वार्डों का गठन बीते 15 मई तक पूरा किया जाना था, लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव में नियम विरुद्घ वार्डों का गठन किया गया। पुनर्गठित नए वार्डों की स्वीकृति के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन शासन द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया और 15 मई बीत गई।
इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पर रोक लग गई। बैक डोर इसे नए परिसीमन को लागू कराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग विफल रहे। अब न्यायालय ने भी याचिका खारिज कर दी है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तैयार हो रही मतदाता सूची में नाम कटवाने व जोड़वाने को लेकर नेताओं के बीच खींचतान शुरू हो गई है। अपने समर्थकों का नाम पंचायत मतदाता सूची शामिल व विरोधियों का नाम कटवाने को लेकर शहमात का खेल चल रहा है। जहां औसत से अधिक मतदाता शामिल हो गए हैं, वहां जांच कराकर नाम कटवाने को लेकर जोर आजमाइश जोर पकड़े हुए है।
मतदाता सूची में जहां से गड़बड़ी की शिकायत मिलेगी, उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। शासन व राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देश के क्रम में कार्रवाई पूरी कराई जा रही है। - अजय कुमार उपाध्याय, जिलाधिकारी