गोंडा। बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही पर नौ हॉस्पिटल व एक पैथालॉजी संचालक को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस भेजा है। सीएमओ ने चेतावनी दी है कि तीन दिन के भीतर मांगे गए दस्तावेज न उपलब्ध कराए जाने पर लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
बता दें कि जिले में 120 से अधिक निजी अस्पताल व पैथालॉजी संचालित है, जिनसे करीब 10 टन अस्पताली कचरा रोज निकलता है। लेकिन अधिकांश अस्पतालों की ओर से बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से 21 फरवरी को अभियान चलाकर निरीक्षण किया गया था।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि दस संस्थानों में बायोमेडिकल वेस्ट रखने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं थी। लॉग बुक उपलब्ध नहीं मिला। इससे नोटिस भेजकर छह माह का बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण का लॉगबुक, नवीनतम प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इन्हें जारी किया गया नोटिस
मेडिसिन हॉस्पिटल, सुधा न्यूरो हॉस्पिटल, डॉ. दिग्विजय सिंह मेमोरियल हॉस्पिटल, चंदन पैथालॉजी, पैथकाइंड पैथालॉजी, कृष्णा केयर सेंटर, कस्तूरी हॉस्पिटल, ओलिव पैथालाॅजी व लाइफ लाइन हॉस्पिटल।
संक्रमण का कारण बन सकता बॉयोमेडिक वेस्ट
खुले में पड़ा बायोमेडिकल वेस्ट अस्पताल आने वाले मरीजों व तीमारदारों के लिए संक्रमण का कारण बन सकता है। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि अस्पतालों से निकलने वाला कचरा बेहद खतरनाक होता है। इंजेक्शन, आईवी सेट व बोतलें व ऑपरेशन से निकला मांस का टुकड़ा व खून मरीजों व तीमारदारों के लिए खतरनाक हो सकता है।
लॉगबुक न उपलब्ध कराने वालों का पंजीकरण होगा निरस्त
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा के अनुसार जो अस्पताल व पैथालॉजी संचालक तीन दिन के भीतर बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण का छह महीने का लॉगबुक व अधिकृत संस्था की ओर से जारी प्रमाणपत्र नहीं उपलब्ध कराएगा, उसका पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा।