फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वीर सपूतों से जुडे धरोहरों को बचाने की दरकार

विज्ञापन
गोंडा में राजा सगरा के सामने महाराजदेवी बक्स सिंह पुस्तकालय परिसर स्थित राजा देवी बक्स सिंह की प - फोटो : GONDA
विज्ञापन
गोंडा। देश की आजादी को लेकर देश के अन्य भागों के साथ ही गोंडा में 1856 में ही स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी सुलगने लगी थी। स्वतंत्रा से जुड़े सेनानियों ने 1856 से लेकर 1858 तक स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों को मात दी थी। देश आजाद होने के बाद अब ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए जिम्मेदारों ने कोई काम नहीं किया। जिससे ऐतिहासिक धरोहरों का क्षय हो रहा है। पेश है अमर उजाला की रिपोर्ट-
विज्ञापन

धरोहरों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे समाजसेेवी धर्मवीर
देेेश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को आज भी समाजसेवी धर्मवीर आर्य संजोए हैं। समाजसेवी धर्मवीर आर्य गोंडा के ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए आज भी प्रयास कर रहे हैं। धर्मवीर ने बताया कि राधाकुंड तालाब का निर्माण राजा देवी बख्श सिंह ने कराया था। यहां स्नान के बाद राजा के परिवार के लोग अंदर बनी सुरंग के रास्ते सगरा तालाब के टीले पर बने गोवर्धन मंदिर में पूजन अर्चन के लिए जाया करते थे। मगर समय के साथ ही तालाब का स्वरूप भी बदल गया और गोवर्धन मंदिर झाड़ियों से घिर गया। अब उसे दूर से ही देखा जा सकता है। इसके जीर्णोद्धार के लिए वह प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से कई बार गोवर्धन मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का प्रयास किया। मगर अभी तक सफलता नही मिली।
पांच दशक से सगरा तालाब में गिरता है नाले-नालियों का पानी
गोंडा के राजा देवी बख्श सिंह ने मालवीय नगर स्थित सगरा तालाब का निर्माण कराया था। शहर के मध्य भाग में स्थित यह तालाब उस दौर में शहर के मनोरम स्थलों में शुमार था। मगर आबादी बढ़ने के साथ तालाब में शहर के नालों और नालियों का गंदा पानी बहने लगा। पिछले पांच दशक से तालाब की सफाई नहीं कराई गई। इससे तालाब के करीब से गुजरने पर सड़ांध आती है।
विज्ञापन

की ड्योढ़ी पर ताजिएदार करते हैं सजदा
गोंडा के राजा देवी बख्श सिंह की शहर के महराजगंज मोहल्ले में ड्योढ़ी है। जानकार बताते हैं कि यहां मोहरम्मद के दौरान ड्योढी के सामने से जब भी ताजिया निकलती है तो ताजिएदार राजा देवी बख्श सिंह के सम्मान में ड्योढ़ी पर सजदा करते हैं। ड्योढ़ी की भी देखभाल नहीं हो रही थी। मगर वर्ष 2006 में यहां ताजिया गुजरने के दौरान विवाद हो गया था। तभी से जिला प्रशासन ने यहां ग्रिल लगवा दी। जिससे अब ताजिएदार ग्रिल के बाहर से ही सजदा करते निकल जाते हैं।
इनसेट बदल गई तस्वीर, राधाकुंड तालाब बन गया क्रिकेट मैदान
गोंडा के राजा देवी बख्श सिंह के पूर्वज राजा शिव प्रसाद सिंह ने शहर के राधाकुंड मोहल्ले में तालाब का निर्माण कराया था। उस समय यहां आबादी के लिहाज से कम लोगों की बस्ती थी। जिससे तालाब में पानी भी कम हुआ करता था। इसी तालाब से एक सुरंग सगरा तालाब में तक गई है। जहां टीले पर गोवर्धन मंदिर व कुएं का निर्माण कराया गया था। मगर देखरेख के अभाव में मंदिर झाड़ियों से घिरा है। वहां कोई जाने की हिम्मत नही जुटा पाता। हालांकि सगरा तालाब से ही जुड़े दूसरे भाग को मत्स्य पालन केंद के तौर पर बिकसित किया गया है। राधाकुंड तालाब का जीर्णोद्धार तो कराया गया। मगर देखभाल के अभाव में तालाब के अंदर बड़ी-बड़ी घास व झाड़ियां उग आई हैं। इसी के बीच खिलाड़ियों ने इसे क्रिकेट का मैदान बना दिया। यहां अब नाइट टूर्नामेंट का आयोजन होता है।
बजट न मिल पाने के कारण नहीं हो पाया सुंदरीकरण
राधाकुंड के सभासद प्रतिनिधि अलंकार सिंह ने बताया कि राधाकुंड के सुंदरीकरण कराने के लिए वह प्रयासरत हैं। काफी हद कार्य कराए गए हैं लेकिन बजट के अभाव में बहुत कार्य नहीं कराया जा सका।दयानंदनगर के सभासद प्रतिनिधि आशीष मोदनवाल ने बताया कि राधा कुंड का कुछ हिस्सा उनके क्षेत्र में पड़ता है, उसे सुंदर बनाने के लिए वह कई बार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन सुंदरीकरण के लिए जरूरी बजट न मिल पाने के कारण कार्य आधा अधूरा रह गया।
जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने दिया ध्यान
पीपल तिराहे के कपड़ा व्यवसायी रामचंद्र का कहना था कि राधाकुंड सहित अन्य धरोहरों के विकास के लिए जितनी तवज्जो दी जानी चाहिए, उतनी नहीं दी गई जिसके चलते विकास नहीं हो पाया। अधिवक्ता दीनानाथ त्रिपाठी का कहना है कि जिले के जनप्रतिनिधि जिले के विकास व सुदंरीकरण पर कम अपने विकास पर अधिक ध्यान देते रहे हैं जिसके चलते शहर के धरोहर व ऐतिहासिक स्थल जीर्णशीर्ण होते जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें