करनैलगंज (गोंडा)। खेतों में नमी व बुआई के समय उर्वरकों की कमी से किसान गेंहू की बोआई से मुंह मोड़ रहे हैं। तहसील करीब 50 फीसदी किसानों का मोहभंग हुआ है। किसानों का सरसों के साथ गन्ने की फसल की तरफ रुझान बढ़ रहा है। बीते माह बेमौसम बरसात से खेतों में नमी और सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर हो रही परेशानी भी एक कारण है। वहीं, दलहन और तिलहन के मूल्य भी बढ़े हैं।
क्षेत्र के किसानों ने गेहूं की 40 फीसदी बोआई ही कम कर दिया। करीब 10 फीसदी किसानों ने गन्ने की फसल पैदा करने का मन बनाया है। जिससे गेंहू की पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस वर्ष किसान गेहूं की तरफ से मुंह मोड़ कर दलहन और तिलहन की फसल की ओर रुख कर चुका है।
दलहन व तेलहन की फसल काटने के बाद एक बार फिर गन्ने की बुवाई करने का भी मौका रहता है। जिससे इस बार अधिकांश खेतों में गेहूं की जगह सरसों, लाही एवं दलहन की फसल नजर आ रही है। अक्तूबर माह में लगातार मूसलाधार बारिश से खेत खलिहान लबालब हो गए थे और बाढ़ की नौबत आ गई थी। यह नजारा कई दशक बाद किसानों को देखने को मिला।
जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खेतों में नमी लगातार बनी होने के कारण खेतों की जोताई और फसल की बोआई में किसानों को दिक्कत हुई। किसान गेहूं के बजाय लाही, सरसों, तिल और दलहन की फसल बो रहे हैं। 15 दिसंबर से जब गेहूं की बोआई में उर्वरकों में डीएपी व यूरिया खाद की कमी रही। एक आंकड़े के मुताबिक गत वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष 35 से 40 फीसदी गेहूं की पैदावार कम होने का अनुमान है। (संवाद)
नमी अधिक होने से खेत तैयार नहीं कर सके किसान - किसानों में पवन कुमार दूबे पराग, कन्हैयालाल, माधव, हरिश्चन्द्र, दुलारे, सरदार अवतार सिंह, गौरीशंकर, बुधिराम, कमलेश, रमेश शुक्ला, सुखदेव, बाबूराम, मटरू सिंह आदि का कहना है कि गेंहू की फसल बोने के लिए खेत तैयार नही किया जा सका। खेतों में नमी अधिक थी। कई कई बार जुताई करके खेत सूखने के लिए छोड़ा गया मगर बोआई योग्य नही हो सका, ऊपर से उर्वरक की कमी थी समय से उर्वरक नही मिल रही थी व गेंहू पैदा हो जाने के बाद उसका सही मूल्य नही मिल पा रहा है। इससे अच्छा तिलहन व दलहन को पैदा करने पर विचार किया गया। इस बार अक्टूबर में हुई बरसात से किसानों को गेहूं होने में दिक्कत हुई। खेतों में नमी अधिक होने के कारण अधिकांश किसान गेहूं के बजाय दलहन व तिलहन फसल की तरफ मुड़े हैं। इससे गेहूं की पैदावार में मामूली गिरावट आने की संभावना है। इसके साथ ही जिले में दलहन और तिलहन की फसल अच्छी होने की उम्मीद है।
जिले में उर्वरक आवश्यकता से अधिक आ चुकी है। मगर किसान जो बेहतर समझता है वह बुवाई कर रहा है। जेपी यादव - जिला कृषि अधिकारी गोंडा