गोंडा। परिवार परामर्श केंद्र में रविवार को उस समय सभी चौंक गए जब एक विवाहिता ने अपने पति के सामने यह शर्त रख दी कि वह तभी ससुराल जाएगी, जब शौहर उसे संयुक्त परिवार से अलग रखेगा। परामर्श केंद्र में आए कुल दस मामलों में सिर्फ एक ही मामले में सुलह हो सकी, जबकि अन्य में या तो पक्ष उपस्थित नहीं हुए या समझौता नहीं हो सका।
बहराइच जनपद के कैसरगंज से आए युवक और नगर कोतवाली क्षेत्र की विवाहिता के बीच विवाद चल रहा है। महिला दो साल के मासूम के साथ परामर्श केंद्र पहुंची और स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह संयुक्त परिवार में नहीं रहना चाहती। शर्त रखी कि शौहर या तो अलग घर बनाए या किराए पर कमरा लेकर रहे, तभी वह साथ जाएगी। पति ने मजदूरी कर परिवार चलाने की मजबूरी जताई और कहा कि वह पत्नी और बच्चे के साथ रहना चाहता है। लेकिन अलग मकान बनवाना उसके बस में नहीं है। परामर्शदाताओं ने बताया कि इस मामले में पूर्व में भी समझौता हो चुका है। लेकिन फिर भी दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ रहने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में यह मामला लंबा खिंचने की आशंका के चलते बंद कर दिया गया है। इंस्पेक्टर अनीता यादव ने बताया कि रविवार को आए कुल 10 मामलों में से केवल एक ही मामले में समझौता हो सका, आठ फाइलें एकतरफा अथवा दोनों पक्षों के अनुपस्थित रहने के कारण बंद कर दी गईं। एक मामले में विधिक कार्रवाई की सलाह दी गई है।
सुनवाई में पहुंचे एएसपी, पर नहीं रुका बाहरी दखल
रविवार को आयोजित परिवार परामर्श केंद्र की सुनवाई में एएसपी (पूर्वी) मनोज कुमार रावत दोपहर करीब एक बजे पहुंचे। महिला थाना परिसर में आयोजित केंद्र में फिर एक बार बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की शिकायत सामने आई। परामर्शदाताओं ने कहा कि बाहरी हस्तक्षेप की वजह से कई मामलों में समझौता नहीं हो पाता और परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं।
मैडम, ससुराल नहीं जाऊंगी... बच्चों के लिए खर्च चाहिए
एक महिला ने इंस्पेक्टर अनीता यादव से गुहार लगाई कि वह ससुराल नहीं जाना चाहती, लेकिन पति बच्चों की परवरिश के लिए खर्च दे। उसने आरोप लगाया कि ससुराल में उसके साथ ससुर परेशान करते हैं। इंस्पेक्टर ने उसे समझाया कि यदि वह पति के साथ नहीं रहना चाहती तो खर्च के लिए अदालत की शरण लेनी होगी। पुलिसकर्मियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिला अपने फैसले पर अडिग रही।