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परास हत्याकांड में पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी पर रोक

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गोंडा। तीन अप्रैल को उमरीबेगमगंज थाना क्षेत्र के परास मझवार गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में 46 दिन बाद पीड़ित पक्ष पर दर्ज कराई गई एफआईआर में कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने मंगलवार को रोक लगा दी है। दोहरे हत्याकांड में मारे गए लाठी सिंह के भाई अजय कुमार सिंह की ओर से हाईकोर्ट में की गई रिट पर मंगलवार को हुई सुनवाई में पीड़ित पक्ष के वकीलों की ओर से दी गई दलीलों और साक्ष्यों के आधार कोर्ट ने एफआईआर में आरोपित सभी लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है।
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बता दें कि बीते 18 मई को उमरीबेगमगंज थाने में घटना के 46 दिन बाद तत्कालीन एसओ अतुल चतुर्वेदी ने गोलीकांड में मृतक लाठी सिंह के घायल भाई विजय कुमार सिंह और अजय कुमार सिंह सहित लगभग दर्जनों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। दबाव अधिक बढ़ा तो जांच को स्थानांतरित करने के बाद एसओ को भी लाइन हाजिर कर दिया गया लेकिन बाद में अतुल चतुर्वेदी पर पांच दिन के भीतर ही कृपा बरसी और एसओजी प्रभारी बना दिया गया। लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट की ओर से आये फैसले से पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
हाईकोर्ट में दायर की गई रिट पर जो फैसला आया उसके बारे में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता आरपी मिश्रा, इंद्रजीत शुक्ला और केएन मिश्रा ने बहस की। अधिवक्ता इंद्रजीत शुक्ला ने बताया कि कोर्ट ने माना है कि पुलिस की ओर से दोहरे हत्याकांड में आरोपितों के साथ मिलकर पूरे मामले को प्रभावित करने और पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह भी माना है कि यह केस क्रास केस नहीं है बल्कि काउंटर ब्लास्ट है। जिससे घटना के प्रत्यक्षदर्शियों पर दबाव बनाया जा सके।
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