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Gonda News: 100 से अधिक मवेशी बीमार, दवा न डॉक्टर का इंतजाम

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हलधरमऊ के दत्तनगर गांव में संक्रमित पशु का उपचार करते डॉ. अनिल कुमार। स्रोत: सोशल मीडिया 
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हलधरमऊ/गोंडा। जिले में लंपी वायरस से प्रभावित एक हजार से अधिक जानवर अब तक खोजे जा चुके हैं। वहीं, 100 से अधिक दुधारू पशु बीमार बताए जा रहे हैं। अब तक कई पशुओं की मौत से पशुपालकों की आर्थिक व्यवस्था टूट गई है। इससे जहां पशुपालक परेशान हैं। वहीं, चिकित्सालयों में तैनात करने के लिए न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही टीकाकरण का भरपूर इंतजाम हो पाया है।
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अधिकारियों ने बताया कि जिले में 38 पशु चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं, मगर विभाग के पास सिर्फ 17 डॉक्टर ही है। इनसे से ही किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। प्रत्येक अस्पताल में फार्मासिस्ट तक नहीं हैं। पशुधन प्रसार अधिकारी की भी भारी कमी है। अधिकारियों ने बताया कि लंबी वायरस के प्रकोप को देखते हुए 1.5 लाख डोज की मांग की गई थी। अब तक 60 हजार जानवरों का टीकाकरण किया गया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी शशि कुमार शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। प्रभावित पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। 100 से अधिक जानवर अभी भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। जल्द ही 90 हजार डोज की जिले में आपूर्ति हो जाएगी।
एक दर्जन गांवों में है प्रकोप
हलधरमऊ। दत्तनगर गांव में ही करीब एक दर्जन जानवर बीमारी की चपेट में हैं। दो गायों की मौत भी हो चुकी है। मलौना के प्रधान प्रतिनिधि लल्लन पांडेय ने बताया कि ग्राम पंचायत के 10 से अधिक जानवर प्रभावित हैं। रामगढ़ और पहाड़ापुर के पशुपालकों ने भी कई पशुओं में लंपी लक्षण देखे। दत्तनगर के प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र मिश्र, पशुपालक अमरेश मिश्र, बाबादीन, अरुण कुमार व शिवकुमार ने बताया कि पशु डॉक्टरों और दवाओं की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। पतिसा के शैलेंद्र शुक्ल, सुधीर कुमार, राम उजागर ने इस प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताई।
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डिप्टी सीवीओ डॉ. आरके तिवारी का कहना है कि रोकथाम के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। लंपी वायरस गांठदार त्वचा रोग एक संक्रामक बीमारी पैदा करता है, जो मवेशियों को प्रभावित करती है। यह वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे कीटों द्वारा फैलता है। इस बीमारी से मनुष्यों को कोई खतरा नहीं होता है।
सीमित वैक्सीन व कर्मचारियों के कारण टीकाकरण की रफ्तार धीमी

पशु अस्पताल के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि वैक्सीन की कमी और सीमित कर्मचारियों के कारण अभियान धीमा है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त वैक्सीन की मांग विभाग से की गई है। उनका कहना है कि गोटपॉक्स वैक्सीन का असर होने में करीब 25 दिन लगते हैं। इसलिए देर से शुरू हुआ अभियान पशुओं को तुरंत सुरक्षा नहीं दे पा रहा है।
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