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Gonda News: गरीबों के इलाज में विधायकों की कंजूसी, नहीं खर्च किया बजट

Tue, 10 Dec 2024 12:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। जिले के सात विधायकों और एक विधान परिषद सदस्य को विधायक निधि से 40 करोड़ का बजट प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में मिलता है। विकास कार्य के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर गरीबों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बतौर स्वास्थ्य निधि के रूप में 25 लाख भी शामिल है। लेकिन, जिले के किसी भी विधायक ने स्वास्थ्य निधि में एक रुपया भी खर्च नहीं किया है। सदर विधायक ने एक व्यक्ति का प्रस्ताव जरूर दिया है, लेकिन अभी वह जारी नहीं हो सका।
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वित्तीय वर्ष 2024-25 में पूरी विधायक निधि का आवंटन जारी होने के बाद प्रस्ताव भी सभी ने दे दिए हैं। इसमें एक विधायक की ओर से एक नाम को छोड़कर किसी ने भी अपनी स्वास्थ्य निधि से किसी गरीब का इलाज कराने की पहल नहीं की। कमोबेश यही हाल वित्तीय वर्ष 2023-24 में भी रहा। यह जरूर रहा कि कोरोना काल में सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराने के लिए सभी विधायकों ने पहल की थी और स्वास्थ्य निधि से बजट उपलब्ध कराया था। इससे प्रत्येक सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा मिली थी। इसके बाद विधायकों ने स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी निधि से व्यक्तिगत लाभ देने में हाथ बांध लिए। ज्यादातर प्रस्ताव सड़क, पुलिया, स्ट्रीट लाइट, तोरण द्वार आदि पर ही खर्च हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी विधायकों ने रुचि दिखाई है, कई स्कूलों को संसाधन दिए हैं।
परियोजना निदेशक चंद्रशेखर ने बताया कि विधायकों की ओर से स्वास्थ्य संबंधी लाभ के लिए किसी का प्रस्ताव दिया जाता है तो उसके किसी अन्य योजना में लाभ न लेने की पुष्टि की जाती है। इसके बाद बजट का आवंटन जिला स्तरीय समिति से होता है। फिलहाल एक प्रस्ताव मिला है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
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ऐसे मिल सकता है स्वास्थ्य निधि से लाभ
विधायक निधि का लाभ देने के लिए विधायक को ग्राम्य विकास विभाग को पत्र लिखना पड़ता है। इसके बाद ग्राम विकास विभाग की ओर से अस्पताल से मिले मरीज के बिल का भुगतान किया जाता है। यह मदद असाध्य रोगों जैसे कैंसर, लीवर और किडनी की बीमारी से जूझ रहे गंभीर व गरीब रोगियों को ही मिलती है। अधिकतम मदद पांच लाख रुपये तक होती है। शर्त यह है कि मरीज के परिवार की सालाना आय एक लाख रुपये से ऊपर न हो। मरीज को राज्य व केंद्र सरकार के किसी स्वास्थ्य संबंधी योजना का लाभ न मिला हो। आवेदन के लिए आय, जाति, निवास और आधार समेत कई जरूरी कागजात लगते हैं। ग्राम्य विकास विभाग केवल पीजीआई और एम्स में भर्ती होने पर ही बिल का भुगतान करता है। अन्य निजी व सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर निधि का लाभ नहीं दिया जाता।


सीएम से दिलाई जाती है मदद, विधायक निधि में हैं कई शर्तें
गौरा विधायक प्रभात वर्मा का कहना है कि विधायक निधि से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सहायता देने का प्रावधान तो है, लेकिन काफी शर्तें हैं। वहीं, मदद की सीमा भी पांच लाख रुपये तक तय है और गंभीर व असाध्य रोग ही शामिल हैं। इन बीमारियों पर मरीजों का खर्च अधिक होता है, जो विधायक निधि से संभव नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाई जाती है। वहां 15 दिन में ही आसानी से सहायता मिल जाती है। इसी वित्तीय वर्ष में 200 से अधिक गरीब मरीजों का इलाज कराया गया है। इसके अलावा आयुष्मान योजना से बड़े स्तर पर पूरे जिले के लोगों को लाभ दिया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने जो कार्य किया है, कभी नहीं हुआ है।

जिम्मेदारी से निभानी चाहिए जनता के प्रति जवाबदेही
पूर्व मंत्री एवं करनैलगंज के पूर्व विधायक योगेश प्रताप सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाया जाना उचित है, लेकिन विधायक निधि से भी गरीबों के इलाज के लिए बजट खर्च करना चाहिए। विधायकों को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही पूरी जिम्मेदारी से निभानी चाहिए।
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