यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन गुरुवार को ही अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। सचल दस्तों के साथ लगाए गए सुरक्षा कर्मी डीआईओएस कार्यालय पर इंतजार करते रहे और सचल दस्ते उन्हें लिए बिना ही चले गए। परीक्षा केंद्रों के बाहर एक भी पुलिस कर्मी नजर नहीं आया। वहीं कंट्रोल रूम में महज दिखावा बन रहा।
बोर्ड परीक्षा का कंट्रोल रूम जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मेें बनाया गया है, जिसमें कोई व्यवस्था नहीं रही, जबकि कंट्रोल रूम में 24 घंटे के लिए कर्मी लगाए गए हैं।
इसे तीन पालियों में बांटा गया है। सुबह छह से दो बजे तक, दो से आठ बजे रात तक व रात आठ से सुबह छह बजे तक कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
प्रथम पाली में सुखराम वर्मा, त्रिलोकीनाथ मौर्य, विजय कुमार, द्वितीय पाली में डॉ. इसरा अहमद, शिवश्याम मिश्र, बब्ली सिंह, दिनेश मिश्र व तृतीय पाली में अरुण पाठक, मिठाईलाल, विनोद पांडेय, राधेश्याम पांडेय की तैनाती की गई है।
लेकिन बोर्ड परीक्षा की द्वितीय पाली में कंट्रोल रूम मे नामित कर्मचारी बब्ली सिंह अन्य सहयोगियों का इंतजार कर रही थीं। इस दौरान न उनके पास कोई सूचना संबंधी अभिलेख मिला और न ही कोई परीक्षा संबंधी सूचना ही।
जिले के विद्यालयों में नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए प्रशासन ने सात सचल दल प्रभारी बनाए। प्रत्येक सचल दल प्रभारी के साथ चार सहयोगी भी लगे हैं।
सचल दल में डीआईओएस वीरेंद्र कुमार दूबे, बीएसए फतेह बहादुर सिंह, वित्तलेखा अधिकारी शंभूलाल, प्रधानाचार्य जीआईसी राम सिंह, चंद्रभानु सिंह, कंचन बाला सक्सेना, नूतन खन्ना प्रभारी विद्यालयों के निरीक्षक के लिए तैनात हैं। सुरक्षा के मद्देनजर हर दल के साथ एक पुलिस जवान लगाया गया है, लेकिन कोई सचल दल प्रभारी अपने साथ इन्हें नहीं ले गए। जिससे पूरा दिन ये जवान अपनी ड्यूटी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर ही देते रहे।
इस बार सभी केंद्र व्यवस्थापकों को मोबाइल से वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट ऑनलाइन अटेंडेंस डाट ओआजी पर परीक्षा में शामिल बच्चों की उपस्थिति अपलोड करानी थी। दिन भर केंद्र व्यवस्थापक उपस्थिति अपलोड कराने के लिए फोन पर लगे रहे, लेकिन उपस्थिति दर्ज नहीं जा सकी।
पहली पाली की परीक्षा के बाद बोरे में सील कर उत्तर पुस्तिकाओं को जीआईसी में बनाए गए कोठार तक बाइक, साइकिल से पहुंचाया गया। इन उत्तर पुस्तिकाओं को परीक्षा केंद्र से कोठार तक पहुंचाने के लिए किसी प्रकार की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई।