बीती फरवरी में भंभुवा में हुई जनसभा के दौरान जो वादा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोगों से किया था, उसे पूरा करते हुए उन्होंने करनैलगंज के चचरी मांझा इलाके में मिल्क चिलिंग प्लांट के लिए अनुपूरक बजट में डेढ़ करोड़ रुपये की राशि आवंटित कर दी है।
इस प्लांट से घाघरा व सरयू के कछार पर बसे ग्रामीणों और पशुपालकों के दूध का संकलन होगा। इसके लिए सरकारी वाहन भी लगाए जाएंगे। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री और करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह ने जब भंभुवा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आए थे, तभी सीएम से इसकी घोषणा करवा दी थी।
इससे क्षेत्र के करीब 10 हजार पशुपालकों को लाभ मिलेगा और उनके दूध की सही कीमत मिल सकेगी। यह करनैलगंज क्षेत्र के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
बीती 26 जनवरी को देवीपाटन मंडल के कमिश्नर कार्यालय का लोकार्पण हुआ था। इस भवन का लोकार्पण तो हो गया, लेकिन इसमें किसी भी कक्ष में नई कुर्सी, मेज व पर्दे नहीं लग पाए थे। पुराने कमिश्नर कार्यालय में प्रयोग होने वाले फर्नीचर से ही यहां काम चलाया जा रहा था।
यहां अपर आयुक्त व आयुक्त का न्यायालय भी है। इसके अलावा तीन अपर आयुक्त के कक्ष, एक आयुक्त का कक्ष सहित करीब दो दर्जन कक्ष हैं। हर कमरे में कुर्सी व मेज सहित अन्य उपकरणों की जरूरत है। आयुक्त कक्ष में तो मात्र आधा दर्जन ही कुर्सी हैं।
कमिश्नर कार्यालय-न्यायालय के लिए प्रदेश सरकार के अनुपूरक बजट में 50 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे कमिश्नर कार्यालय को नया लुक मिलेगा और वादकारियों व फरियादियों के लिए बेंच की व्यवस्था हो सकेगी। देवीपाटन मंडल के आयुक्त मुरलीधर दूबे का कहना है कि जिले से यह दोनों प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजे गए थे।
चचरी मांझा में अगर मिल्क चिलिंग प्लांट लगता है तो इससे इलाके के दूधियों को काफी फायदा होगा। साथ ही नए बनकर तैयार हुए उनके कार्यालय के लिए की गई 50 लाख रुपये की व्यवस्था से कार्यालय को नया सेटअप देकर उसे हाइटेक किया जाएगा। फिलहाल जब तक वह सोमवार को पेश बजट का पूरा अध्ययन न कर लें, इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकते।
मौजूदा समय गोंडा शहर में जलनिकासी के लिए न तो कच्चे-पक्के नालों की कोई मुकम्मल व्यवस्था है ओर न ही नालियों की। इसके कारण थोड़ी सी बरसात में यहां के लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसके लिए यहां केंद्र सरकार की योजना जेएनयूआरएम के तहत सीवर लाइन डाले जाने का प्रस्ताव तीन साल पहले तैयार कर शासन को भेजा गया था।
यही नहीं इसके प्रस्ताव के बाबत गोंडा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यहां तक घोषणा की थी कि जल्द से जल्द इस प्रस्ताव के लिए धन की व्यवस्था कराकर इसका काम चालू करा दिया जाएगा। लेकिन तब से लेकर आज तक इस प्रस्ताव के लिए किसी तरह के धन की कोई व्यवस्था नहीं हुई।
अनुपूरक बजट में इन योजनाओं के लिए भी नहीं मिला धन
- जरवल-गोंडा फोरलेन सड़क, लागत 539 करोड़।
- 9 ब्लॉकों में 16 बड़ी सड़कों का निर्माण, लागत-208 करोड़।
- जिले के 16 ब्लॉकों में सड़क सहित अन्य योजनाओं के 83 काम, लागत 661 करोड़ रुपये।
- परसपुर में आईटीआई व ग्रामीण स्टेडियम की स्थापना।
- ढेमवाघाट पर पुल का निर्माण, लागत 1200 करोड़ रुपये
- कैथी घाट पर पाइप पुल का निर्माण।
- तरबगंज में मंडी का निर्माण।