मनकापुर (गोंडा)। कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों का विलय कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की कवायद जमीनी स्तर पर इतर नजर आ रही है। पेयरिंग के बाद नए स्कूल में शिफ्ट हुए पुराने स्कूल के बच्चों की राह में पड़ रहा रेलवे ट्रैक, हाइवे और जंगल बच्चों की पढ़ाई में अड़ंगा लगा रहा है।
इससे अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकारी स्कूल का मोह छोड़कर उन्हें निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने को विवश होने लगे हैं। मनकापुर ब्लॉक क्षेत्र में दो चरणों के दौरान अब तक 50 बच्चों से कम नामांकन वाले 17 स्कूलों का पेयरिंग के तहत विलय हो चुका है।
ढाई किलोमीटर दूर विद्यालय में विलय
चौबेपुर के कटका उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ दो बच्चे होने के कारण ढाई किलोमीटर दूर कंपोजिट विद्यालय चौबेपुर में विलय किया गया। अब दोनों विद्यालयों को मिलाकर स्कूल में कुल 197 बच्चे हो गए हैं। दूरी अधिक होनेे के कारण बुधवार को सिर्फ तीन बच्चे ही स्कूल में उपस्थित रहे। कम बच्चों के चलते मध्यांह भोजन भी नहीं बन सका। वहीं, कटका चौबेपुर का एक भी बच्चा स्कूल नहीं आया।
रेलवे ट्रैक व नाला बना स्कूल की राह में बाधा
प्राथमिक विद्यालय देवरहना का डेेढ़ किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय गड़रही में विलय किया गया। देवरहना के 33 बच्चों को मिलाकर 113 बच्चों में से बुधवार को 80 बच्चेे ही उपस्थित मिले। प्रभारी शिक्षक संजय कुमार मौर्य ने बताया कि देवरहना के 20 और गड़रही के 60 बच्चे उपस्थित रहे। इस स्कूल में जाने के लिए मनकापुर-मसकनवा हाइवे मार्ग व रेलवे अंडरपास पार करना पड़ता है। इस लिए अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
इसी तरह प्राथमिक स्कूल बखरवा नवीन के 26 बच्चों को बखरवा गांव के विद्यालय में भेज दिया गया। बीच में सोइया नाला होने से अभिभावक की चिंता बढ़ गई। वहीं, मिश्रौलिया कला विद्यालय को ढाई किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय समसापुर में विलय किया गया है। यहां 50 बच्चे उपस्थित रहे। दूरी और कीचड़ युक्त रास्ता होने के कारण मिश्रौलिया कला के बच्चे स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं।
लापरवाही से बंद हुआ स्कूल
कटका गांव निवासी जग प्रसाद, विनीता, धोखई, राम केवल, हनुमान वर्मा, राम उग्गर आदि अभिभावकों का कहना है कि उनके गांव का स्कूल जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बंद हुआ है। यहां की समस्याओं को लेकर शिकायत भी की गई थी लेकिन, कार्रवाई नहीं हुई। बखरवा गांव के शिव प्रसाद वर्मा, शेष राम प्रजापति का कहना है कि स्कूल बंद हो जाने से अब बच्चों को विलय वाले स्कूल में न भेजकर नजदीक के निजी स्कूल में भेजना मजबूरी बन गया है।
मंशा की अनुरूप हुआ विलय
बीईओ अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप ही स्कूलों का विलय किया गया है। इसमें दूरी का भी पूरा ध्यान रखा गया है। शुरूआत में जरुर कुछ परेशानी हो रही है लेकिन इससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा।