गोंडा। लॉकडाउन में जिले में खोले गए शेल्टर होम में रह रहे लोगों को अब मानसिक स्वास्थ्य देने की पहल होगी। इसके लिए मानसिक रोग से जुड़े स्वास्थ्य कर्मी लोगों को सलाह देंगे। आश्रय स्थलों या शेल्टर होस में रह रहे प्रवासी मजदूरों को मानसिक तनाव बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहल की है। इन मजदूरों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए अब उनकी काउंसलिंग की जाएगी।
इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं ने शुक्रवार को सीएमओ और जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को एक पत्र जारी किया गया है। यह जानकारी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मलिक आलमगीर ने दी। गौरतलब है कि कोर्ट ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह सुनिश्चित करे कि लॉकडाउन के दौरान समस्त शेल्टर होम में आमजन को किसी तरह के मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।
इस संबंध में जिला स्वास्थ्य विभाग को शुक्रवार को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि लॉकडाउन के दौरान आश्रय स्थलों में रह रहे प्रवासी मजदूरों को मानसिक रूप से स्वस्थ्य रखने के लिए समय-समय पर काउंसलिंग करें। इस कार्य के लिए जिले में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत तैनात साइकेट्रिस्ट, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर की मदद लें।
साथ ही यह भी निर्देश है कि जिन जनपदों में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संसाधन उपलब्ध नहीं है वहां राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम या अन्य कार्यक्रम में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर से सेवाएं ली जाएं। स्वास्थ्य कर्मी सीएचसी पर भी मरीजों को सलाह दे रहे हैं। कोरोना से प्रभावित तो कोई नहीं है लेकिन सलाह देकर स्वस्थ्य जीवन देने की पहल हो रही है। हर सीएचसी पर काउंसलर हैं और वह लोगों को सलाह दे रहे हैं।