गोंडा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में पढ़ाई के साथ ही अब शोध के कार्य भी शुरू होंगे। विशेषज्ञ चिकित्सक विभिन्न बीमारियों पर शोध कर सस्ता इलाज ढूंढ़ेंगे। शोध कार्य शुरू करने के लिए रिसर्च कमेटी गठित करके भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद में आवेदन किया गया है। अनुमति मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज में शोध शुरू हो सकेंगे।
मेडिकल कॉलेज में हर दिन 1,700 से ज्यादा मरीज आते हैं। अति कुपोषित बच्चे एनआरसी में भर्ती होते हैं। विभिन्न प्रकार की बीमारी से ग्रसित बच्चों का पीआईसीयू में इलाज होता है। इन मरीजों की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर उन पर शोध कर सकेंगे। इसके बाद परिणाम सकारात्मक आते हैं तो उसे दूसरे पर लागू किया जाएगा।
प्रधानाचार्य के अनुमोदन पर शोध के लिए आठ लोगों की कमेटी बनाई गई है। जिसमें पांच संकाय सदस्य, एक अधिवक्ता, एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक समाज का उच्च शिक्षित या किसी शोध कार्य का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने बताया कि शोध कमेटी बनाकर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया गया है। अनुमति मिलते ही शोध कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
शोध कमेटी के प्रमुख कार्य
- शोध प्रस्तावों की समीक्षा करना और उन्हें मंजूरी देना।
- शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
- शोध की प्रगति की निगरानी करना।
- नैतिक पहलुओं पर विचार करना।
- शोधकर्ताओं को मार्गदर्शन प्रदान करना।
शोध कार्य के फायदे
- संकाय सदस्यों व छात्रों के ज्ञान और कौशल में वृद्धि।
- मरीजों की बेहतर देखभाल व सस्ता उपचार उपलब्ध होगा।
- चिकित्सा क्षेत्र में प्रगति व बेहतर डॉक्टर तैयार होंगे।
- शोध कार्यों से मेडिकल कॉलेज की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।