नेपाली पानी के चलते खरझार पहाड़ी नाला गुरुवार को सुबह फिर उफना गया। नाले के उफान से महराजगंज तराई-ललिया मार्ग सहित अन्य कई गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। लगातार हो रही कटान के चलते इस मार्ग के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रशासन नाले की बाढ़ व कटान के प्रति उदासीन बना हुआ है।
बारिश व कटान के कारण गुरुवार सुबह खरझार पहाड़ी नाले में आए उफान के चलते कनहरा, कमदी, बनकटवा, प्यारेडीह, तिवारीडीह, जुम्मनडीह, लोहेपनिया व परसिया गौरी समेत 15 गांव पानी से घिर गए हैं। बाढ़ के चलते खेतों में लगी धान व दलहनी की फसलें भी डूब गई हैं। इन गांवों की तरफ जाने वाले रास्तों पर पानी भर जाने से आवागमन में दिक्कत हो रही हैं।
बाढ़ के चलते महराजगंज तराई-ललिया मार्ग पर भी पानी भर जाने से भारी वाहनों का आवागमन करीब चार घंटे तक बाधित रहा। बाढ़ से इस मार्ग के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। पुल का एप्रोच मार्ग लगातार कटकर नाले में समा रहा है। क्षेत्रीय गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से होकर गुजर रहे हैं।
क्षेत्रवासी राजेंद्र कुमार वर्मा, जोखूराम यादव, डॉ. सुल्तान, मोबीन व राजू आदि ने बताया कि खरझार नाले से हर साल होने वाली तबाही रोकने की मांग हम लोग लगातार करते आ रहे हैं। गत माह डीएम प्रीति शुक्ला ने मौके का मुआयना कर सभी आवश्यक उपाय करने का निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिया था, लेकिन आज तक प्रशासन ने कुछ नहीं किया। इन लोगों ने चेतावनी दी है यदि प्रशासन ने शीघ्र कोई कार्रवाई नहीं की तो वह आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।