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मनरेगा में 51 करोड़ के भुगतान में फंसे कई अफसर

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गोंडा। मनरेगा योजना से गांवों के विकास और गरीब श्रमिकों को रोजगार देने में बड़े पैमाने पर खेल हो रहा है। एक बार फिर मनरेगा में 51 करोड़ के भुगतान में खेल उजागर हुआ है। मनरेगा गाइडलाइन की अनदेखी करके तीन ब्लॉकों के अधिकारियों ने 51 करोड़ का भुगतान कर दिया। मामला सामने आने के बाद तीनों ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारियों, लेखाकारों और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों के विरुद्घ कार्रवाई शुरू हुई है। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है, लेकिन वे लोग जवाब देने में आनाकानी कर रहे हैं। सीडीओ ने फिर से नोटिस जारी की है और पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है।
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विकास योजनाओं में धांधली के लिए पहले से चर्चित मुजेहना ब्लॉक में अनियमित भुगतान का मामला साढ़े छह करोड़ से बढ़कर 21 करोड़ 41 लाख 26 हजार रुपये का हो गया है। इसमें मुजेहना ब्लॉक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्रमिकों को तो 12 करोड़ 41 लाख 30 हजार रुपये का भुगतान किया, लेकिन नियमों की अनदेखी करते हुए सामग्री के नाम पर भी 8 करोड़ 62 लाख 96 हजार रुपये का भुगतान निकाल लिया है। इस तरह के बजट खर्च करने से मनरेगा की गाइडलाइन तो टूटी ही है, गबन की आशंका भी बढ़ गई है। इस बार गड़बड़ी करने में नवाबगंज ब्लॉक भी रिकॉर्ड बनाने की ओर चल रहा है। आधा दर्जन से अधिक लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होने के बाद भी यहां सुधार नहीं है।
यहां पर 15 करोड़ 97 हजार 92 हजार रुपये का अनियमित भुगतान का मामला पकड़ में आया है। ब्लॉक के अधिकारियों व कर्मचारियों ने श्रमिकों पर तो 7 करोड़ 95 लाख 39 हजार रुपये का भुगतान किया और सामग्री पर 8 करोड़ दो लाख 53 हजार रुपये का बजट निकाल लिया है। इसी तरह वजीरगंज ब्लॉक में भी 14 करोड़ 8 लाख 24 हजार रुपये के भुगतान का मामला उजागर हुआ है। यहां पर भी नियमों की अनदेखी करके श्रमिकों के लिए 7 करोड़ 24 लाख 29 हजार रुपये का भुगतान किया और 6 करोड़ 83 लाख 95 हजार रुपये सामग्री पर खर्च किया है। नियमों के मुताबिक यह भुगतान नहीं हो सकता है। सीडीओ ने मनरेगा में तय श्रम सामग्री के अनुपात की अनदेखी करने को गंभीरता से लिया है और इन तीनों ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी व प्रथम हस्ताक्षर कर्त्ता लेखाकार से जवाब तलब किया है। उन्होंने मामले की जांच भी शुुरू कर दी है।
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ब्लॉक के अफसरों के साथ फंसेंगे पंचायत के कर्मी
ब्लॉकों में मनरेगा की गाइडलाइन की अनदेखी किए जाने के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। तीनों ब्लॉकों के उन पंचायतों की सूची भी मांगी गई है जहां पर नियमों की अनदेखी करके भुगतान किया जा रहा है। मुजेहना की नौ पंचायतों के कर्मचारियों को भी नोटिस दिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अनियमित भुगतान के मामले में ब्लॉकों की पंचायतों के कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी। सीडीओ ने नियमों का उल्लंघन करने वाली पंचायतों के सचिवों के साथ ही कार्य प्रभारी, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवकों से भी स्पष्टीकरण लेने और कार्रवाई तय करने का निर्देश दिया है।
नहीं मान रहे चेतावनी, नोटिस का जवाब देने में भी आनाकानी
मनरेगा में गड़बड़ी करने वालों के मन बहुत बढ़ गए हैं। स्थिति यह है कि एक तो कई बार उच्चाधिकारियों की ओर से वेतन, मानदेय रोक कर चेतावनी देने की कार्रवाई की गई। इसके बावजूद सुधार नहीं हुआ और जब नोटिस जारी करके जवाब मांगा जा रहा है तो जवाब देने में भी आनाकानी की जा रही है। गड़बड़ियों पर फिर से सभी को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है और उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
मनरेगा के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तीन ब्लाकों के अधिकारियों को चेतावनी दिया गया है और स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। जो जिम्मेदार होंगे उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। -शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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