युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल की ओर से गुरुवार को आयोजित खेल प्रतियोगिता में जहां 100 मीटर दौड़ में मदनमोहन सिंह, 1500 मीटर में पंकज सिंह, 800 मीटर दौड़ में अतुल सिंह तो वहीं 200 मीटर दौड़ में दिवाकर सिंह ने बाजी मारी। उधर, अन्य खेलों में भी तुलसी स्मारक इंटर कॉलेज के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। प्रतियोगिता के बाद विजेता खिलाड़ियों को मुख्य अतिथि के द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता के आयोजक क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी निशिकांत रावत ने बताया कि 100 मीटर दौड़ में मदनमोहन सिंह प्रथम, विशाल सिंह द्वितीय तथा अरशद अहमद तृतीय स्थान पर रहे।
1500 मीटर दौड़ में पंकज सिंह को पहला, शिवम् सिंह को दूसरा तथा शिवमोहन पाण्डेय को तीसरा स्थान मिला। इसी तरह 800 मीटर दौड़ में अतुल सिंह को प्रथम, मदनमोहन सिंह को द्वितीय तथा सिद्धान्त सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
गोला फेंक में शैलेश सिंह प्रथम, मनीष कुमार सिंह द्वितीय तथा कौशल कुमार सिंह को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। इसी तरह 200 मीटर दौड़ में दिवाकर सिंह प्रथम, राकेश कुमार शुक्ला को द्वितीय व सिद्धार्थ सिंह को तीसरा स्थान मिला।
उधर, डिस्कस थ्रो में शैलेश सिंह को पहला, मनीष कुमार सिंह को दूसरा तथा अनुज प्रताप सिंह को तीसरा स्थान मिला। जैवलिन थ्रो में मनीष सिंह को पहला, शैलेश सिंह को दूसरा तथा अनुज प्रताप सिंह को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
400 मीटर दौड़ में नीरज सिंह को प्रथम, शिवमोहन पाण्डेय को द्वितीय तथा रवि सिंह को तीसरा स्थान मिला। इसी तरह लंबी कूद में राकेश शुक्ला को पहला, पुनीत सिंह को दूसरा तथा विशाल सिंह को तीसरा स्थान मिला।
5000 मीटर दौड़ में संदीप यादव को प्रथम स्थान, कुलदीप सिंह को दूसरा स्थान तथा आशीष सिंह को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
वॉलीबाल में कैलाश सिंह, अनुज प्रताप सिंह, शैलेश सिंह व जितेंद्र सिंह परसपुर विजेता तथा तलेपुरवा उपविजेता घोषित किए गए। कबड्डी में तलेपुरवा विजेता तथा राजटोला को उपविजेता घोषित किया गया।
इसी तरह बालिका वर्ग में भी 100 मीटर दौड़ में शिवानी सिंह प्रथम, उत्प्रेक्षा सिंह द्वितीय तथा अंजली सिंह तृतीय स्थान पर रहीं।
200 मीटर दौड़ में सोमी सिंह को पहला, शिवानी सिंह को दूसरा तथा वर्षा सिंह को तीसरा स्थान मिला। 400 मीटर दौड़ में शिबा ख़ातून को प्रथम, अंजली सिंह को दूसरा तथा सोनी सिंह को तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।