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जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रमुख चुनाव में टोकन का दांव

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गोंडा। जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत प्रमुख के चुनाव में बाजी जीतने को कवायद तेज हो गयी है। कुर्सी हथियाने की जोड़तोड़ में जुटे राजनीतिक दलों के दिग्गज टोकन के दांव से अपनी अपनी चाल चल रहे है। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए 65 सदस्यों को मतदान करना है और इनमें से ज्यादातर ने प्रत्याशी तो नही लेकिन पाला जरूर तय करना शुरू कर दिया है।
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कुर्सी हथियाने के प्रबंधन में जुटे लोग इसके लिए गुपचुप टोकन का वितरण कर रहे हैं। एक जिला पंचायत अध्यक्ष व 15 ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर दांव अजमाने वालों ने मतदान करने वाले नवनिर्वाचित सदस्यों को टोकन देकर आर्शीवाद देना शुरू किया है। डीडीसी व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चेहरे की मुस्कान इसकी पूरी कहानी खुद बया कर रही है। हालाकि कोई भी सदस्य इसको लेकर कुछ भी कहने से बच रहा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव कहने को तो 65 सदस्यों के मतदान से होगा लेकिन इसके लिए एक एक वोट जुटाने को गुपचुप करोड़ों का वारा- न्यारा होगा। जिला पंचायत में साल भर में 40 करोड़ का बजट खर्च होता है। इसी लिए चुनाव के दौरान सदस्य भी अध्यक्ष बनाने को उन्हीं की ओर झुकाव रखते हैं जो उनकी भावनाओं को खुशी से समझ कर पूरा करा सके।
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दूसरी तरफ क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का चुनाव कुछ दूसरे तरह का होता है, अभी कुछ ब्लाकों में प्रत्याशियों ने अपनी क्षमता के अनुरूप सदस्यों को खुश करने की कवायद भी शुरू कर दी है। जानकार बताते है कि इसके लिए बकायद रेट तय है और चुनाव प्रबंधन में जुटे लोग वोटर सदस्यों की थाह लेने में जुटे हैं।
जिले में 16 ब्लाक हैं, जिसमें मुजेहना ब्लाक को छोड़कर बाकी में चुनाव होने हैं। जिसमें इंटियाथोक, कटरा बाजार, तरबगंज, नवाबगंज, बेलसर, हलधरमऊ ब्लाक अनारक्षित श्रेणी में हैं।
इसके अलावा करनैलगंज, बभनजोत के प्रमुख पद अन्य पिछडा महिला वर्ग के लिए, छपिया, मनकापुर में प्रमुख पद अनुसूचित वर्ग के लिए, झंझरी, परसपुर, रूपईडीह की ब्लाक प्रमुख सीट महिला वर्ग के लिए, पंडरीकृपाल ब्लाक अनूसूचित वर्ग की महिला के लिए तथा मुजेहना, वजीरगंज अन्य पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। आरक्षण के आधार पर प्रत्याशी दांव चल रहे हैं। वैसे अनारक्षित और महिला वर्ग के आरक्षित 9 ब्लाकों में कुर्सी पाने को लेकर सरगर्मी ज्यादा तेज है।
जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख में प्रत्याशी जीत सुनिश्चित करने के लिए जीते सदस्यों का प्रमाण पत्र जमा करा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाओं का बाजार काफी गर्म है। माना जा रहा है कि निश्चित धनराशि के बदले में प्रमाण पत्र जमा कराए जा रहे हैं ताकि इनसे मन माफिक मतदान कराया जा सके। प्रमाण पत्र जमा हो जाने पर दूसरा प्रत्याशी दांव नही लगा सकेगा।
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