जिले में बीती रात हुई भारी बारिश के चलते खरझार पहाड़ी नाले में बाढ़ आ गई। बाढ़ के कारण महराजगंज तराई-ललिया मार्ग पानी में डूब गया। इससे करीब छह घंटे तक वाहनों का आवागमन बाधित रहा। गुरुवार को दोपहर बाद एक बजे पानी घटने के बाद मार्ग पर आवागमन बहाल हो सका।
बाढ़ आने से आसपास के करीब 10 गांव पानी से घिर गए हैं। क्षेत्रवासियों ने नाले की सिल्ट सफाई न होने तथा बांध का निर्माण न होने पर आक्रोश जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। गुरुवार सुबह खरझार पहाड़ी नाले में आए उफान से सड़क पर पानी भर गया।
इससे महराजगंज तराई-ललिया मार्ग पर करीब छह घंटे तक वाहनों का आवागमन ठप रहा। कुछ लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पर किसी तरह गुजर रहे थे। दोपहर करीब एक बजे पानी कम होने के बाद मार्ग पर वाहनों का आवागमन बहाल हो सका।
पहाड़ी नाले में आए उफान के चलते लैबुड्डी, कनहरा, बनकटवा, प्यारेडीह, तिवारीडीह, शांतीनगर, परसिया, लोहेपनिया, साहेबनगर व कमदी आदि गांवों के रास्तों पर भी पानी भर गया है। साथ ही यह गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं।
क्षेत्रीय जन संघर्ष सुरक्षा समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार वर्मा, राम दुलारे, गंगाराम, डॉ. सुल्लन, निब्बर व मोबीन आदि ने बताया कि बीते माह डीएम प्रीति शुक्ला ने नाले का निरीक्षण कर अधिकारियों को सिल्ट सफाई तथा बांध का निर्माण कराने का आदेश तो दिया था, लेकिन आज तक कोई काम नहीं हुआ।
इन लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही पहाड़ी नाले की बाढ़ से क्षेत्र में होने वाले नुकसान को रोकने का प्रयास नहीं किया तो वे आंदोलन करेंगे।