स्वामी नारायण छपिया मंदिर का 166वां पाटोत्सव व मंदिर का स्थापना दिवस गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। दूरदराज से आए हरिभक्तों ने पंचगव्य से स्वामीनारायण भगवान को स्नान कराकर उनका श्रंगार किया और स्वादिष्ट व्यंजनों से बना छप्पन भोग उन्हें अर्पित किया।
इस दौरान भगवान स्वामी नारायण की कथा का उपस्थित हरिभक्तों ने विस्तार से वर्णन किया। कथा वाचक भक्तिनंदनदास महराज ने भगवान स्वामी नारायण के बाल्यकाल से लेकर उनके जीवन लीला के तमाम अध्याय लोगों को सुनाए। इस दौरान देश-विदेश से आए स्वामीनारायण के भक्तों ने बढ़-चढ़कर कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महंत स्वामी वासुदेवानंद, हरिस्वरूपानंद, अखिलेश्वरदास, माधव तिवारी आदि मौजूद रहे।
क्या है छप्पनभोग
छप्पन भोग में रसगुल्ला, चंद्रकला, रबड़ी, शूली, दही, भात, दाल, चटनी, कढ़ी, साग-कढ़ी, मठरी, बड़ा, कोणिका, पूरी, खजरा, अवलेह, वाटी, सिखरिणी, मुरब्बा, मधुर, कषाय, तिक्त, कटु पदार्थ, अम्ल (खट्ट पदार्थ), शक्करपारा, घवेर, चिला, मालपुआ, जलेबी, मेसूब, पापड़, सीरा मोहनथाल, लौंगपूरी, खुरमा, गेंहू की दलिया, पारिखा, सौंफलघा, लड्डू, दुधीरूप, खीर, घी, मक्खन, मलाई, शाक, शहद, मोहनभोग, अचार, सबूत, मंडका, फल, लस्सी, मट्ठा, पान, सुपारी और इलायची होती है।
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पंचगव्य
गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर-रस से तैयार पदार्थ को पंचगव्य कहा जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य की शुरूआत इसके बिना नहीं होती, जिसके अपने कई चिकित्सीय महत्व भी होते हैं।