पाल्हापुर बाढ़ चौकी से नकहरा गांव में मंगलवार को बंटने के लिए आए लंच पैकेटों को यहां के बाढ़ पीड़ितों ने लेने से मना कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों के संग प्रधान प्रतिनिधि महेश गुप्ता का आरोप है कि प्रशासन बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के बजाय उनकी अनदेखी कर रहा है। जिसके चलते मंगलवार को गांव में बंटने के लिए आए लंच पैकेटों को ग्रामीणों ने लेने से मना कर दिया।
वहीं, एसडीएम करनैलगंज अनिल कुमार मिश्र ने ग्रामीणों की ओर से लंच पैकेट न लेने की बात को गलत बताया। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को सारी मदद तय शेड्यूल के तहत ही मुहैया कराई जा रही है। किसी की अनदेखी उनकी तरफ से नहीं की जा रही है।
नकहरा गांव के प्रधान प्रतिनिधि महेश गुप्ता की मानें तो उनकी ग्राम पंचायत के सभी 13 मजरे बाढ़ के पानी से घिरे हैं। जिसके लिए उनकी ओर से गांव के 568 बाढ़ पीड़ितों की पूरी लिस्ट तहसील प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी है।
लेकिन इसके बाद भी सोमवार को जब उनके गांव में खाद्यान्न की किट बांटी गई तो केवल 200 परिवारों में से यह किट 160 परिवारों को ही दी गई। जबकि बाकी बची 40 किट बांटी ही नहीं गई। जिसे लेकर मंगलवार को जब प्रशासन के लोग गांव में लंच पैकेट बांटने गए तो ग्रामीणों ने उसे लेने से मना कर दिया। जिसके पीछे एक वजह इस पैकेट में दिए जाने वाले खाने को लेकर भी है। क्योंकि इन पैकेटों में दी जाने वाली पूड़ी की संख्या बहुत कम है। जिसके खाने से पेट भी नहीं भरता। इस पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की।
हालांकि एसडीएम अनिल कुमार मिश्र से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने प्रधान प्रतिनिधि की ओर से लगाए गए आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर से किसी भी बाढ़ पीड़ित की अनदेखी नहीं की जा रही है।
सोमवार को नकहरा गांव में 160 बाढ़ पीड़ितों को राशन की किट बांटी गई थी। जबकि बाकी 40 किटों का वितरण अन्य बाढ़ गांव के पीड़ितों को किया गया। रही बात खाने का पैकेट लौटाए जाने की तो ऐसी कोई बात नहीं है।