नंदिनीनगर में कथा के दौरान भजन गाते सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज। स्रोत: आयोजक
नवाबगंज। नंदिनी नगर महाविद्यालय परिसर में आयोजित राष्ट्रकथा में सोमवार को सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज ने राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और नागरिक कर्तव्यों की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि वह एक जीवंत चेतना है, जो संस्कार, परंपरा और त्याग से निर्मित होती है।
सद्गुरु ऋतेश्वर ने कहा कि जब समाज अपने कर्तव्यों को भूल जाता है, तब राष्ट्र कमजोर होता है। जब प्रत्येक नागरिक धर्म के मार्ग पर चलता है, तब राष्ट्र स्वतः सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि अधिकार मांगने से पहले कर्तव्य निभाना सीखना होगा। भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति है, जिसने सदैव मानवता, करुणा और सत्य का मार्ग दिखाया है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल सुविधा और अधिकार की चिंता न करें, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी समझें। रामचरितमानस, वेद और उपनिषदों के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बताया कि संस्कारों की शुरुआत परिवार से होती है और यही संस्कार आगे चलकर राष्ट्र निर्माण की नींव बनते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार, श्रद्धा और अनुशासन से युक्त समाज किसी भी संकट के सामने नहीं झुकता।
उन्होंने कहा कि जो लोग भारत में स्वतंत्रता नहीं होने की बात करते हैं, उन्हें अपने गौरवशाली इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने भारतीय और यूरोपीय दर्शन के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में जीवन का उद्देश्य मोक्ष है, जबकि यूरोपीय जीवन दृष्टि भौतिक सुख तक सीमित है। हनुमान चालीसा के पाठ के साथ कथा को विश्राम दिया गया। इस अवसर पर बृजभूषण शरण सिंह, सांसद करण भूषण, विधायक प्रतीक भूषण के साथ ही कई विशिष्ट जन और अन्य लोग मौजूद रहे।