गोंडा। करनैलगंज के प्राइमरी स्कूल नरायनपुर साल में भी स्कूल की खाली पड़ी भूमि के कब्जाने का मामला सामने आया है। यहां पर जर्जर भवन हटाने के बाद खाली पड़ी भूमि पर कब्जा हो रहा है। इसकी आशंका होने पर खंड शिक्षा अधिकारी ने एसडीएम को पत्र भी लिखा है। लेकिन भूमि की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों की गुहार के बाद भी अधिकारी स्कूल की भूमि को सुरक्षित करने को गंभीर नही हैं, इससे कब्जेदारों का हौसला बढ़ा हुआ है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जर्जर भवन को ढहाने की कार्रवाई बीते साल बड़े पैमाने पर किए गए हैं। इसके बाद एक के बाद एक स्कूल की भूमि को गांव के बड़ों के कब्जे में कराने का खेल चल रहा है। इसमें विभाग के बड़े अफसरों की मिलीभगत से अब जमीन पर कब्जे हो रहे हैं। प्राइमरी स्कूल नरायनपुर साल का निर्माण भी 1965 में आबादी की भूमि पर हुआ था। नए भवन का निर्माण दूसरे स्थान करा दिया गया, लेकिन पुराना भवन उस भूमि पर बना रहा। जिससे कोई कब्जा नही कर सका। बीते साल पुराने भवन की नीलामी करके विभाग ने ढहवा दिया। इसके बाद यहां की भूमि भी खाली हो गई और गांव के लोग कब्जे का प्रयास करने लगे। इससे वहां के प्रधानाध्यापक ने प्रबंध समिति की बैठक कर भूमि पंचायत के सुपुर्द करके बाउंड्री बनवाकर सुरक्षित करने की मांग किया। लेकिन पंचायत की ओर से बाउंड्री नहीं बनाई गई और कब्जे का प्रयास होता रहा। खंड शिक्षा शिक्षा अधिकारी आरपी सिंह ने बीते साल एसडीएम को पत्र लिखकर अतिक्रमण होने की जानकारी दी। इसके बाद भी भूमि की सुरक्षा के लिए प्रयास नही किए गए। अब फिर उस खाली पड़ी भूमि पर कब्जा हो रहा है। जिससे सरकारी भूमि पर संकट बढ़ गया है।
जिलाधिकारी ने स्कूलों की भूमियों की मांगी रिपोर्ट
स्कूल की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा होने की शिकायत को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बीएसए से पूरी रिपोर्ट मांगी है। बीएसए विनय मोहन वन ने बताया कि रिपोर्ट तैयार की जा रही है। स्कूल की भूमि की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। इसके साथ ही खाली पड़ी भूमि पर किचन गार्डेन आदि विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। जिससे भविष्य में भी भूमि कब्जा करने का कोई प्रयास न कर सके। बताया जा रहा है कि जिले के कई स्थानों पर रिक्त भूमि पर कब्जे की कोशिश हो रही है।
नए स्थान पर स्कूल भवन के निर्माण से आ रही है दिक्कत
पुराने जर्जर भवनों को हटाकर नए स्थान पर स्कूल भवन का निर्माण कराने से दिक्कत आ रही है। कई स्थानों पर तो जर्जर भवन हटाने के पहले ही दूसरे स्थान पर स्कूल भवन बनवा दिए गए। जिससे अब खाली पड़ी भूमि पर लोगों की निगाहें जमी हुई हैं। पहले ही पुराने स्थान पर ही भवन का निर्माण कराया गया होता तो भूमि खाली नही पड़ी रहती। अधिकतर भूमि गांव के भीतर है तो आसपास के लोग आसानी से कब्जा करने में सफल हो जाते हैं। अब जांच होने से कई स्थानों का मामला सामने आएगा।
बेसिक शिक्षा की योजनाओं पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है। स्कूल के जमीन की सुरक्षा के लिए बीएसए को निर्देश दिए गए हैं। हर मामले की जांच कराई जा रही है। शशांक त्रिपाठी, सीडीओ