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घूंघट की ओट से बोलीं : टिकैत के आंसू खींच लाए धरने में

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गांधी स्मारक पार्क में चल रहे धरने को घूंघट की ओट से संबोधित करतीं ओमवती देवी। - फोटो : GONDA
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गोंडा के गांधी स्मारक पार्क में चल रहे क्रमिक धरने में मंगलवार को महिलाएं भी शामिल हो गईं। नारेबाजी करते हुए पहुंची इन महिलाओं ने चेहरे लंबे घूंघट से ढंक रखे थे लेकिन आवाज में केंद्र सरकार के खिलाफ ललकार थी। हिरनोटी महिला मंडल की अध्यक्ष ओमवती देवी ने घूंघट की ओट से धरने को संबोधित करते हुए कहा कि किसान नेता राकेश टिकैत के आंसू उन्हें इस आंदोलन में खींच लाए हैं।
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ओमवती देवी ने कहा कि वह सभी (महिलाएं) किसी के भेजने अथवा बुलावे पर धरने में नहीं पहुंची हैं। हर पहलू को समझती हैं। किसान आंदोलन में परिवार समेत तन, मन व धन से अपनी भागीदारी निभाएंगी। कहा कि ऐसी सरकार हमने नहीं देखी कि किसान कृषि कानूनों को वापस कराना चाहते हैं और सरकार आंख, कान मूंदे हुए है। दिन-रात खेतों में मेहनत कर हम देश का पेट भरते हैं। क्या हम आतंकवादी हैं? दिल्ली की सीमाओं पर धरनास्थल के आसपास सीमेंटेड बैरिकेडिंग की जा रही है। क्या देश में तानाशाही का दौर है?
सुरेश देवी ने कहा कि प्रशासन ये जान ले कि हम खेतों में विषम परिस्थितियों में भी काम करने से नहीं हटते तो ये हालात क्या चीज हैं? महिला शक्ति गांव-गांव महिलाओं को जागरूक करेगी। धरने में गुड्डी देवी, सीमा देवी, रेखा देवी, जीतो देवी, ललता, ममता, शकुंतला, ओंकारी, चित्रा देवी, राजेश देवी, देवीचरन सिंह, देव गौतम, धर्मेंद्र, हरेंद्र सिंह, पंकज चौधरी आदि शामिल रहे।
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कृषि कानूनों की वापसी तक जारी रहेगी लड़ाई
भारतीय किसान यूनियन का इस्माइलपुर गेट पर चौथे दिन भी धरना जारी रहा। तहसील अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेती यह लड़ाई जारी रहेगी। कहा कि सरकार किसानों को गुमराह कर रही है। गाजीपुर सीमा पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों पर अत्याचार किया गया। किसान नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए। धरने में छोटेलाल, अर्जुन सिंह, दाताराम, बाबी चौधरी, बन्ने चौधरी, नफीस, साकिर अली आदि मौजूद रहे।
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