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खुशबू की होगी प्लास्टिक सर्जरी, पीजीआई में इलाज शुरू

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गोंडा के जिला अस्पताल में एसिड अटैक पीड़िता की मदद के लिए पहुंचे छांव फाउंडेशन के सदस्य। - फोटो : GONDA
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गोंडा। परसुपर के पसका गांव में एसिड अटैक से गंभीर रूप से झुलसी बेटी खुशबू को छांव फाउंडेशन का साथ मिला है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने जिला अस्पताल में पहुंचकर बेटी का हाल जाना और पीजीआई के लिए रेफर कराया। संस्था के दुर्गा प्रसाद शुक्ल ने कहा कि वह बेटी का पूरा इलाज कराएंगे और जरूरत पड़ी तो प्लास्टिक सर्जरी भी कराई जाएगी। इसके साथ दो अन्य बेटियों को जिला अस्पताल में ही बेहतर इलाज के लिए अपनी टीम के सदस्यों को लगाया है। छांव फाउंडेशन की पहल से बेटी के जीवन में एक बार फिर मुस्कान लौटने की उम्मीद भी जगी है।
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लखनऊ सामाजिक संस्था ‘छांव फाउंडेशन’ की टीम बुधवार की सुबह गोंडा के सरकारी अस्पताल पहुंची जहां पर हाल में ही हुए एसिड अटैक की तीन पीड़िताएं भर्ती थीं। छांव फाउंडेशन की रीचआउट टीम ने सरकारी अस्पताल में मौके पर पहुंचकर पीड़िताओं के वार्ड में साफ-सफाई व ड्रेसिंग की व्यवस्था में काफी हीलाहवाली पाई। एसिड अटैक की पीड़िताओं में से एक बड़ी बहन का चेहरा तेजाब से बुरी तरह से जल चुका है। वह आंखें खोलने व बोलने में भी असमर्थ है।
संस्था के दुर्गाप्रसाद शुक्ला ने पीड़ित बेटी को लखनऊ के पीजीआई हॉस्पिटल रेफर कराया और वहां के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड डॉ. राजीव अग्रवाल से पीड़िता के जल्दी समुचित इलाज के लिए फोन पर बातचीत की। छांव फाउंडेशन की रीचआउट टीम की सदस्या अंशू व फराह ने अन्य दो बहनों के लिये गोंडा के सरकारी अस्पताल में ही अस्पताल प्रबंधन से बात करके उनके लिए वार्ड में पूरी साफ सफाई व इलाज की समुचित व्यवस्था कराई गई। साथ ही पीड़िताओं व उनके परिजनों से बातचीत करके उनको मानसिक संबल प्रदान किया।
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घर बसने से पहले बिखर गए बेटी के सुनहरे सपने
गोंडा। पसका की तीन बेटियों पर एसिड अटैक ने एक हंसते खेलते परिवार की खुशियां छीन ली। जख्म ऐसा दिया है कि पूरी जिंदगी दर्द से भरा रहेगा। घर बसने से पहले ही बड़ी बेटी के सुहाने सपने चकनाचूर हो गए। पुलिस ने एक युवक को मुठभेड़ में गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन इससे परिवार के लोगों को तसल्ली नहीं है। बेटी के दर्द से पूरा परिवार ही नहीं हर कोई कराह रहा है। परिवार में सबकी दुलारी और हर काम में हाथ बंटाने में आगे रहने वाली खुशबू एसिड अटैक की घटना के एहसास से ही चौंक जा रही है। जिला अस्पताल में इलाज से वह राहत तो महसूस कर रही है, लेकिन एसिड से मिले दाग तो पूरे जीवन भर रुलाने के लिए काफी हैं।
एसिड अटैक का नाम सुनकर हर कोई दिल थाम कर बैठ जाता है, लेकिन जिसके साथ ऐसा हुआ है उसकी क्या दशा होगी, यह महसूस किया जा सकता है। 17 साल की खुशबू भी और बेटियों की तरह सुनहरे सपने पाले आगे बढ़ रही थी। 25 अक्तूबर को गोदभराई होने की तैयारी थी और पूरा परिवार मगन था कि बेटी के हाथ जल्द पीले करके विदा कर देंगे। पर किसी को क्या पता था कि किसी दरिंदे की नजर बेटी की खुशियों पर टिकी है। ऐसी हरकत किसी ने सपने में भी नहीं सोंचा था। पसका जैसे ग्रामीण गांव में भी कोई दरिंदा एसिड फेंकने जैसी घिनौनी हरकत करेगा यह चौंकाने वाला है। बेटी के चेहरे पर एसिड पड़ा है, यह तो शुक्र रहा कि सोने के कारण बेटी की आंखें बच गईं। उनके साथ सो रहीं दोनो बहनें भी झुलसी हैं लेकिन खुशबू की जिंदगी दर्द से भर गई है। जिला अस्पताल में इलाज करा रही खुशबू से लोग मिलने जाते हैं तो आंसू के सिवा उसके पास कुछ नही है। बोलने तक की हिम्मत नहीं है, दर्द के मारे सिसक रही बेटी को अब अपने आगे के जीवन की चिंता भी सता रही है।
सहमा है एसिड अटैक पीड़िता का परिवार और गांव
एसिड अटैक पीड़िता का परिवार हादसे से सहमा हुआ है। बेटी की स्थिति से तो बेहाल है ही दुश्मनी होने की आशंका से भी डर समाया हुआ है। गांव की सियासत में क्षेत्र पंचायत सदस्य होने के साथ ही गुुरई लोगों के कपड़े प्रेस करके अपना परिवार चला रहा था। अब ऐसे हालात उसके सामने हो गए हैं कि उसे सूझ नही रहा है। गुरई अपनी बेटी के साथ न्याय चाहता है और परिवार के सुरक्षा को लेकर उसके माथे पर चिंता की लकीरें भी साफ दिख रही हैं। जिला अस्पताल में हर पार्टी के नेता के सामने हाथ जोड़ कर वह न्याय और सुरक्षा की गुहार लगा रहा था।
फिक्र आगे की पढ़ाई और बेटी के विवाह की
एसिड अटैक से बेटी का जो हाल हुआ है उससे परिवार ही नहीं गुरई के रिश्तेदार काफी फिक्रमंद हैं। उनकी चिंता बेटी के आगे की पढ़ाई की और विवाह की है। हाईस्कूल की पढ़ाई कर रही बेटी, हादसे से इस कदर सहम गई है कि गुमशुम रह रही है। अभी तो वह दर्द से परेशान है और उसे कुछ सूझ नहीं रहा है। अब आगे वह पढ़ाई कैसे पूरा करेगी और कौन उसका हाथ थामेगा। इसको लेकर भी परिवार के लोग फिक्रमंद हैं।
... याद आता है वह मंजर तो कांप उठती हैं बेटियां
सोमवार की वह रात जब अपनी बहनों के साथ सो रही खुशबू सोने छत पर गई तो कोई चिंता नहीं था। रात दो बजे के बाद जिस तरह उसका बदन अचानक आग जैसे झुलसने लगा तो वह समझ ही नही पाई कि क्या हो गया। करंट लगा कि आग लग गई, तीनों बहनें दर्द के मारे शोर मचाने लगीं। बाद में पता चला कि किसी दरिंदे ने एसिड अटैक किया। यह मंजर आज भी उसे याद आता है तो आंखों में खून उतर आता है और वह कांप उठती हैं।
एसिड अटैक की घटना काफी गंभीर है, परिवार को हर संभव मदद सरकार की ओर से दी जाएगी। प्रदेश सरकार को मदद के लिए संस्तुति भेज दी गई है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है। -डॉ. नितिन बसंल, जिलाधिकारी
बेटी का जाना हाल, पसका पहुंचकर खुलवाया बाजार
एसिड अटैक मामले में सपा के पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह बुधवार को जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बेटी के पिता व बेटी से बात किया। छांव संस्था की ओर से लखनऊ रेफर कराने पर उन्होंने बेटी को लखनऊ रवाना किया। उन्होंने कहा कि बेटी के इलाज में किसी तरह की कोताही नहीं होने दी जाएगी। वहीं उन्हें पता चला कि पसका में पुलिस की ज्यादती से लोग खफा हैं और बाजार बंद करा दिए हैं। जिलाध्यक्ष आनंद स्वरूप उर्फ पप्पू यादव के साथ पहुंचे, पीड़िता की मांग सुनीता से मिले और आश्वासन दिया कि उनके साथ वे सदा हैं। बाजार में लोगों ने 9 अन्य लोगों को पुलिस हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी। मौके पर पहुंचे सीओ से बात करके बेवजह नौ लोगों को बैठाए जाने पर नाराजगी जताई। पुलिस ने 9 लोगों को छोड़ा और फिर बाजार लोगों ने खोल दिया। पूर्व मंत्री ने भी लोगों को समझाया कि घटना ऐसी है कि पुलिस को मेहनत करनी पड़ती है लोग सहयोग दें। पुलिस से भी कहा कि अनावश्यक किसी निर्दोष का उत्पीड़न न करे। जनता सही खुलासे के लिए पुलिस का हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
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