राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद भारत सरकार के तत्वावधान में रविवार को गांधी पार्क टाउन हाल में कबीरदास पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सूरज सिंह ने किया।
मुख्य वक्ता डॉ. फाखरे आलम ने कहा कि भौतिकवादी युग में आध्यात्मिक रचनाओं के संबंध में कबीरदास का महत्व आज सबसे बड़े मार्गदर्शक के रूप में प्रतीत होता है।
डॉ. मो. अकमल ने कहा कि कबीर किसी धर्म व जाति विशेष या धर्म में मंदिर व मस्जिद के विरोधी नहीं थे। वे धर्मस्थलों का विरोध करने वाले धार्मिक गुरुओं के विरोधी थे।
डॉ. उजैर ने कहा कि अमीर खुसरो के बाद कबीरदास उर्दू के सबसे बड़े शायर थे। मो. इब्राहीम उस्ताद ने कहा कि मानव जाति का धर्म होना चाहिए कि वे अपने कमियाें व दूसरे की अच्छाइयां देखें।
राजकुमार नवीन ने कहा कि संत कबीर कवि समाज के सुधारक ही नहीं, एक युग पुरुष थे। कार्यक्रम के समापन पर आयोजक ज्योति विद्या मंदिर जेल रोड के प्रबंधक दयानंद मिश्र ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।