नवाबगंज (गोंडा)। सरकार की मंशा प्राथमिक विद्यालयों के विलय के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की है। उम्मीद सुखद रही, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जुदा हैं। विद्यालयों के विलय के बाद स्कूलों की दूरी के साथ ही भौगोलिक स्थिति भी पढ़ाई में बाधक बन रही है। अभिभावक जंगल व नहर के रास्ते बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते। इस वजह से विलय के बाद बच्चों ने नए स्कूल में जाना ही बंद कर दिया। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को बुलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वैसे नवाबगंज शिक्षा क्षेत्र में अब तक कम नामांकन वाले पांच स्कूलों का विलय किया गया है। पेश है रिपोर्ट
जंगल पार कर नहीं आ रहे बच्चे
जंगली क्षेत्र लिदेहना ग्रंट ननकू पुरवा उच्च प्राथमिक विद्यालय को डेढ़ किलोमीटर दूर लिदेहना ग्रंट कंपोजिट विद्यालय में मर्ज किया गया है। ननकू पुरवा के 28 और लिदेहना ग्रंट के 234 बच्चों को मिलाकर कुल 262 बच्चों के सापेक्ष मंगलवार को 181 बच्चे उपस्थित रहे। प्रधानाध्यापक ओंकारनाथ उपाध्याय ने बताया कि ननकू पुरवा से बच्चों को जंगल पार करके आना पड़ता है। ऐसे में अभिभावक बच्चों को नहीं भेज रहे हैं।
दूरी बढ़ी तो नहीं आया एक भी बच्चा
सरायखत्री प्राथमिक विद्यालय का विलय दो किलोमीटर दूर निर्जन क्षेत्र जटमलपुर प्राथमिक विद्यालय में किया गया है। सरायखत्री में 22 बच्चे नामांकित थे। दूरी अधिक होने के चलते मंगलवार को सरायखत्री प्राथमिक विद्यालय का एक भी बच्चा जटमलपुर के विद्यालय नहीं पहुंचा। प्रधानाध्यापक राजेश्वर यादव ने बताया कि सरायखत्री विद्यालय में एकल शिक्षक था। विलय के बाद जटमलपुर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की संख्या बढ़ी गई, लेकिन बच्चे नहीं आ रहे हैं।
विलय के बाद यहां भी नहीं आए बच्चे
मनकापुर-बंधवा रोड स्थित गौरिया प्रथम विद्यालय को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर गौरिया द्वितीय प्राथमिक विद्यालय में विलय किया गया। रास्ते में नहर और झाड़ियां पड़ती हैं। मंगलवार को गौरिया द्वितीय प्राथमिक विद्यालय में कुल 71 के सापेक्ष 65 बच्चे उपस्थित रहे। गौरिया प्रथम विद्यालय के 20 बच्चों में से एक भी गौरिया द्वितीय प्राथमिक विद्यालय नहीं पहुंचा। प्रधानाध्यापक काली प्रसाद शुक्ल ने बताया कि रास्ते में नहर पड़ने से अभिभावक बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विरोध के बावजूद कर दिया विलय
लिदेहना ग्रंट के प्रधान गिरधारी लाल चौहान का कहना है कि जंगल समेत भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ननकू पुरवा विद्यालय के विलय का विरोध किया गया। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में कुछ बच्चों ने निजी स्कूल में दाखिला ले लिया। कुछ बच्चे नजदीकी गैलनग्रंट स्कूल में पढ़ने लगे हैं। वहीं, सरायखत्री के प्रधान विनोद चौहान का कहना है कि स्कूल विलय का विरोध किया गया। मगर सरकार का निर्देश बताकर विलय कर दिया गया। जबकि विद्यालय दूर होने के चलते बच्चे नहीं जा पा रहे हैं।
बेहतरी के लिए किया गया प्रयास
शैक्षणिक गुणवत्ता व बच्चों की सुविधा को देखते हुए विद्यालय को मर्ज किया गया है। गौरिया प्रथम में पहले भी बच्चे नहीं आते थे। विद्यालय आने में जंगल, नहर और झाड़ियां कोई अड़चन नहीं हैं। बड़े बच्चे दूरी तय कर स्कूल जा सकते हैं। बच्चों को प्रेरित कर स्कूल बुलाने के शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
चंद्रभूषण पांडेय, बीईओ