झूलेलाल धर्मशाला में भजन गातीं महिलाएं। स्रोत: सोशल मीडिया
गोंडा। 10 दिनों से चल रहे झूलेलाल महोत्सव का समापन रविवार को शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा मालवीयनगर स्थित झूलेलाल धर्मशाला से विभिन्न मार्गों से होते हुए देर शाम करनैलगंज स्थित सरयू तट पर पहुंची। वहां प्रतिमा का विसर्जन किया गया। श्रद्धालु भजनों पर भाव विभोर होकर झूमते और नृत्य करते नजर आए।
सिंधी समाज के प्रवक्ता किशन राजपाल ने बताया कि अंतिम दिन सबसे पहले भगवान झूलेलाल की आरती उतारी गई। इसके बाद लाल साईं का पंजड़ा गाकर उनकी स्तुति की गई। भगवान झूलेलाल के भजनों का दौर शुरू हुआ। भक्ति गीतों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा परिसर भक्ति के रंग में रंग गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने ‘आयो लाल, झूलेलाल’ के जयकारे लगाए। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने पल्लव पाकर अरदास की। इस अवसर पर सिंधी समाज के मुखिया जयरामदास लधवानी, राजकुमार ठक्कुर, अनिल कलानी, मथुरादास लधानी, जगदीश रायतानी, दिनेश कुमार ठक्कुर, कैलाश रायतानी, राजेश रायचंदानी, मुकेश धनकानी, ओमी ठक्कुर, उमेश, विजय, मोहन कृपलानी, केशव, रवि ठक्कुर, नीरज तलरेजा, पूरन खत्री, मनोहर बलेचा मौजूद रहे।