गोंडा। आईटीआई मनकापुर के यूनिट हेड को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा दायर अवमानना याचिका में अदालत ने सोमवार को कार्यवाही समाप्त करते हुए मामला निस्तारित कर दिया। न्यायालय ने माना कि अधिकारी ने आदेश का अनुपालन कर दिया है, इसलिए अब कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है।
मनकापुर इकाई से सेवानिवृत्त कर्मचारी रामनारायण तिवारी ने वर्ष 2024 में उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें छुट्टियों के बदले नकद भुगतान (लीव इनकैशमेंट) में आईटीआई प्रबंधन ने अत्यधिक विलंब किया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि विलंब से किए गए भुगतान पर उन्हें ब्याज की राशि भी दी जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने 20 सितंबर 2024 को आदेश पारित करते हुए कहा था कि आईटीआई प्रबंधन छह सप्ताह के भीतर प्रकरण का निस्तारण करे और पात्रता की स्थिति में ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित करे। हालांकि न्यायालय के आदेश के बाद भी कई माह तक आईटीआई प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इस पर रामनारायण तिवारी ने अवमानना याचिका दाखिल कर न्यायालय से हस्तक्षेप की गुहार लगाई। मामले की सुनवाई के दौरान 23 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति सैय्यद कमर हसन रिजवी की पीठ ने आईटीआई मनकापुर के अपर महाप्रबंधक/यूनिट हेड संतोष कुमार सिन्हा को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए तीन नवंबर 2025 की तिथि निर्धारित की थी। हाईकोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद यूनिट हेड संतोष कुमार सिन्हा ने अदालत के मूल आदेश का तत्काल अनुपालन कराया और संबंधित भुगतान की प्रक्रिया पूरी की। सोमवार को जब मामले की सुनवाई हुई, तो यूनिट हेड के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि आदेश का पूर्ण पालन कर दिया गया है। इस पर न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने अवमानना याचिका को निरस्त करते हुए मामला समाप्त कर दिया।