गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों में वसूली को लेकर चल रही जांच की आंच बीएसए कई कर्मचारियों तक पहुंच गई है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने इसके लिए एडीएम, एएसपी व सहायक शिक्षा निदेशक की तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। उन्होंने बीएसए ऑफिस में भी उगाही की जांच करने के आदेश दिए हैं। शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के नाम पर उनसे वसूली का मामला बुधवार को वायरल होने के बाद वजीरगंज की खंड शिक्षा अधिकारी ममता सिंह को निलंबित कर दिया गया था।
अब जिलाधिकारी ने बीएसए की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। जिले से 1085 शिक्षकों का शासन से ऑनलाइन तबादला गैर जिलों में किया गया था। इन्हीं शिक्षकों से कार्यमुक्त किए जाने के नाम पर वसूली की जा रही थी। सभी को कार्यमुक्त करने के लिए दो फरवरी की तिथि तय की गई थी। एक ही दिन में कार्यमुक्त करने का आदेश होने से शिक्षकों में आदेश हासिल करने को लेकर आपाधापी मच गई और इसको लेकर उगाही शुरू हो गई। बीआरसी पर पत्रावलियां अग्रसारित करने के नाम पर पैसे लिए जाने लगे।
खंड शिक्षा अधिकारी वजीरगंज ममता सिंह के लिए बीआरसी परिसर के स्कूल के शिक्षक ने वसूली की और सूची ग्रुप पर डाल दी। इसके बाद हंगामा खड़ा हो गया और शासन ने बीईओ को निलंबित कर दिया। यही नहीं बीएसए ऑफिस में भी शिक्षकों से वसूली की शिकायतें डीएम को मिलीं। मंगलवार की रात में ही डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम को भेज कर जांच कराई। डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि बीएसए ऑफिस में शिक्षक संघ के पदाधिकारी कार्यमुक्त होने का आदेश बांट रहे थे।
वहां अव्यवस्था थी और बीएसए ने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी। उन्होंने बताया कि एलआईयू और अन्य स्रोतों से पता चला कि कार्यमुक्त करने के लिए वसूली की गई है। जिसमें बीएसए की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। बीएसए दफ्तर के सीसीटीवी के फुटेज की भी जांच होगी और शिक्षकों से भी फीडबैक लिया जाएगा। जिलाधिकारी के आदेश के बाद माना जा रहा है कि इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
बीएसए दफ्तर में काम करने वाले भी फंसे
शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के लिए एक दिन का ही वक्त तय था। ऐसे में कई कर्मचारियों के साथ अभिलेखों की जांच में सहयोग करने वाले भी शक के दायरे में आ गए हैं। बीएसए पंतनगर स्थित कार्यालय आने के बजाय विकास भवन के सर्व शिक्षा अभियान के दफ्तर में ही बैठकर फाइलों का निस्तारण कर रहे थे। बाद में वह ऑफिस आए लेकिन रात 11 बजे तक वितरण चला। इससे प्रशासन में खलबली मच गई।
फाइलों के निस्तारण में देरी से मचा घमासान
गैर जिला तबादले के शिक्षकों के कार्यमुक्त करने की फाइलों के बीआरसी से काफी देर से आने और फिर उनके अभिलेखों का मिलान करके कार्यमुक्त का आदेश जारी करने में काफी वक्त लगा। शासन से भी अंतर्जनपदीय तबादलों की सूची आने में करीब एक महीने लग गये। इससे बीआरसी पर प्रक्रिया देर से शुरू हुई। जिसका फायदा उठाते हुए बीआरसी पर अवैध वसूली होने लगी।
कई अन्य पर गिरी गाज, प्रधानाध्यापक भी निलंबित, लेखाकार की सेवा समाप्त
इस बीच खंड शिक्षा अधिकारी के बाद प्रधानाध्यापक शिवशंकर सिंह भी निलंबित कर दिए गए हैं। वहीं लेखाकार विपिन की सेवा समाप्त कर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने निलंबन आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि एफआईआर के लिए कोतवाली नगर में दी गई तहरीर में खंड शिक्षा अधिकारी ममता सिंह के साथ ही प्रधानाध्यापक शिवशंकर सिंह व लेखाकार को नामजद किया गया है। उधर कोतवाल आलोक राव ने बताया कि तहरीर तो मिली है। अभी डीएम की ओर से मामले की जांच कराई जा रही है। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के दौरान धन उगाही की शिकायतों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट मिलने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
-मार्कंडेय शाही, डीएम गोंडा