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40 लाख की आबादी में शुरू हुई कोरोना संदिग्धों की तलाशं

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गोंडा। आपके घर में कोई बुजुर्ग या बच्चा तो नहीं है। अच्छा अगर है तो उनमें से किसी को सर्दी जुकाम बुखार तो नहीं है। ऐसे ही कुछ सवालों से जिले में शहर और ग्रामीण इलाकों में सबको दो-चार होना पड़ेगा। ऐसा केवल आपको कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए किया जा रहा है। क्योंकि कोरोना का कहर पूरे देश में बढ़ता जा रहा है। लगातार मरीजों की संख्या में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोत्तरी हो रही है।
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अब इससे बचने के लिए सरकार ने तगड़ी रणनीति बनाई है जिसमें कोरोना के प्रति संदिग्धों की तलाश की जा रही है। जिससे किसी भी कोरोना संदिग्ध के मिलने पर उसकी तुरंत ही जांच कराकर उसे आइसोलेट किया जा सके। बता दें कि जिले की लगभग 40 लाख की आबादी में कोरोना संदिग्धों की तलाश शुरू हो गई है।
इसके लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संख्या के जनसंख्या के आधार पर टीमों को लगाया गया है। बताया जा रहा है कि टीम की ओर से सर्वे करके सारा डाटा जुटाया जा रहा है। इसमें सर्दी, खांसी और जुकाम वाले मरीजों से जानकारी लेकर उनसे पूरी हिस्ट्री भी खंगाली जायेगी। संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा को सर्वे के लिए लगाया गया है। ये लोग घर-घर जाकर लोगों से उनकी तबीयत का हाल लेंगी और पूरी रिपोर्ट बनाकर संबंधित अफसरों को सौंपी जायेगी।
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डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर मरीजों की विशेष पड़ताल
डायबिटीज के रोगियों और उच्च रक्त चाप से पीड़ित व्यक्तियों का डाटा विशेष रूप से जुटाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश पर गौर करें तो 50 साल से ऊपर के वो लोग जो कि डायबिटीज और हृदय रोग से ग्रसित हैं उनको कोरोना का खतरा अधिक है। इसी तरह से 10 साल से कम उम्र के बच्चों में भी खतरा अधिक है। ऐसे में इन लोगों का डाटा तैयार करना बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही अगर ये लोग सर्दी, जुकाम और बुखार से भी पीड़ित हैं तो तुरंत सूचना देकर ऐसे लोगों की जांच कराई जायेगी।
सोशल डिस्टेंसिंग का रखा जायेगा ख्यालएसीएमओ डॉ. देवराज चौधरी का कहना है कि कोविड संक्रमण के बीच स्वास्थ्य विभाग ने बरसात में दस्तक देने वाली बीमारियों को लेकर दस्तक और विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए कमर कस ली है। शासन स्तर से इस संबंध में ट्रेनर्स को ट्रेनिंग कराया गया है। इसमें नये तौर-तरीकों से अभियान चलाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा गयी है। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग में बताया जा चुका है कि 31 जुलाई तक चलने वाले दस्तक अभियान के दौरान आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी न तो किसी का दरवाजा छुएंगे और न ही कुंडी। पूरी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जायेगा।
डाटा कलेक्शन के साथ ही होगी रहेगी सैंपलिंग
बताया जा रहा है कि एएनएम की अगुवाई में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा लोगों के घर-घर जाकर उनसे डाटा जुटा रही हैं। इस डाटा के आधार पर रोजाना जिले के कंट्रोल रूम में रिपोर्ट तैयार की जायेगी। जिससे कोरोना संदिग्धों की सैंपलिंग भी कराई जायेगी। मुख्यालय से सैंपल कलेक्शन टीम जायेगी और लोगों के सैंपल कलेक्ट करेगी।
फैक्ट फाइल
जिले की आबादी - लगभग 40 लाख
कुल आंगनबाड़ी - 2830
कुल आशा कार्यकर्ता - 3132
कुल सीएचसी - 16
कुल पीएचसी - 50
कुल ग्राम पंचायत - 1054
पूरे जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के साथ ही सभी टीमों को खासतौर पर कोरोना संदिग्धों का डाटा भी जुटाने को कहा गया है। इसमें जिन लोगों में लक्षण संदिग्ध मिलेंगे तो उनकी जांच कराई जायेगी। इस अभियान से बड़े पैमाने पर पूरे में कोरोना संदिग्धों की पड़ताल हो सकेगी। इससे कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने में आसानी होगी।
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-डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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