करनैलगंज (गोंडा)। नेपाल के बैराजों से लगातार छोड़ जा रहे पानी के कारण जिले में बाढ़ के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। लगातार उफना रही सरयू का पानी तीन तहसीलों के 460 गांवों को अपनी चपेट में ले चुका है। इससे करीब 46 हजार की आबादी बाढ़ के संकट से जूझने को मजबूर है। बाढ़ के पानी में 2200 हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। सदर तहसील में भी कुआंनो नदी के उफनाने ने सभी की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है।
हालांकि प्रशासन की तरफ से बाढ़ पीड़ितों को राहत व मदद उपलब्ध कराने की हर संभव कोशिश हो रही है लेकिन लगातार जारी बारिश व जगह जगह व्याप्त जलभराव में अड़ंगा लगा रहा है। सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से अब बांध पर भी खतरा बढ़ने लगा है। जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने मंगलवार को ऐली परसौली पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने के साथ ही बांध की सुरक्षा के इंतजाम को भी देखा। करनैलगंज में सरयू नदी में बढ़ रहे जलस्तर से बाढ़ से प्रभावित इलाकों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। तीन तहसीलों के 106 राजस्व ग्राम बाढ़ से घिरे हैं। जिसमें तरबगंज में 22, करनैलगंज में पांच, सदर में 79 ग्राम बाढ़ से प्रभावित हैं। इन ग्रामों के 460 गांव बाढ़ से घिरे हैं, जिसमें तरबगंज में 171, करनैलगंज में 11, सदर में 278 गांव प्रभावित हैं। इन गांवों की 46792 आबादी बाढ़ की समस्या से जूझ रही है। इसमें तरबगंज में 30290, करनैलगंज में 1993, सदर में 14509 आबादी बाढ़ से घिरे हैं।
पीड़ितों की घर गृहस्थी का पूरा सामान डूबा हुआ है। लोग अपनी जान और जानवरों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर ठिकाना बनाए हुए हैं। तीन गांव मांझा रायपुर, नउवन पुरवा, परसावल ऐसे हैं जहां पक्के कच्चे घर दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं सरयू नदी का जलस्तर भी बढ़ता जा रहा है। खतरे के निशान से करीब सवा मीटर ऊपर पहुंच चुकी नदी की धारा तबाही मचा रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नदी का पानी किनारे बसे गांवों में तेजी से भरने लगा है। सरयू घाट पर सभी सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं।