गोंडा। कुपोषण के खिलाफ जंग को लेकर भले ही सरकार गंभीर हो, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से मासूमों की जान चली जा रही है। ढाई माह के सुजीत को समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण जान गंवानी पड़ी। परिजन मासूम बच्चों को लेकर झोलाछाप के चक्कर काटते रहे, लेकिन कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें उचित उपचार दिलाने वाली आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पता तक नहीं चला।
पड़रीकृपाल के मिश्रौलिया निवासी गेंदालाल व सूर्यपता के ढाई माह के बच्चे की जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में इलाज के दौरान मौत हो गई। पहले तो जिला अस्पताल प्रशासन ने एनआरसी में मौत की बात छिपाने का प्रयास किया, लेकिन शिकायत होने के बाद देर में एनआरसी पहुंचाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
एनआरसी प्रभारी डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि 26 अप्रैल को अजीत और सुजीत नाम के दो जुड़वा बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया था। सुजीत का वजन 3.80 किलोग्राम था। बच्चा डायरिया से पीड़ित होकर गंभीर स्थित में था। जांच कर पीआईसीयू में भर्ती कराने की तैयारी चल रही थी, तब तक उसकी मौत हो गई।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि एनआरसी में बच्चे की मौत होने की जानकारी नहीं है। केंद्र में रखरखाव व स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी के लिए निरीक्षण किया गया है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के कर्मचारियों की समय से एनआरसी में पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है।