गोंडा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में तेजी से फैल रहा संक्रामक बीमारियों का प्रकोप परेशानी को दो गुना बढ़ा रहा है। बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में व्याप्त गंदगी व मच्छरों के कारण बुखार व गैस्ट्रो डायरिया के साथ ही त्वचा संबंधी बीमारियां तेजी के साथ लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। इसके चलते ही बीते दस दिनों में ही तीन हजार से अधिक लोग इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के स्तर से इनके इलाज के लिए चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टॉफ की 7 स्थायी व 24 सचल टीमें भी प्रभावित गांवों में तैनात की गई हैं।
जिले में 121 गांवों की दो लाख आबादी बाढ़ की विभीषिका से परेशानहाल है। बाढ़ के पानी के कारण क्षतिग्रस्त हुए रास्तों व जगह जगह व्याप्त जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना तक दुश्वार है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में तेजी से प्रभाव बढ़ाती संक्रामक बीमारियों ने सभी की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों के अधिकांश लोग दाद, खाज, खुजली, शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने, सर्दी बुखार के साथ ही गैस्ट्रो व डायरिया की शिकायत के साथ इलाज के लिए संचालित बाढ़ चौकियों पर बने स्वास्थ्य शिविर में पहुंच रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मौके पर ही बेहतर इलाज सुविधा मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्थायी तौर पर सात टीमों की तैनाती कर रखी है जबकि 24 मोबाइल टीमें भी गांव गांव जाकर लोगों का इलाज करने के साथ उन्हें मुफ्त दवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।
इस दौरान सीएमओ कार्यालय पर बने बाढ़ कंट्रोल रूम पर दर्ज सूचनाओं के आधार पर ही प्रभावित गांवों में संक्रामक रोगों से पीड़ितों के इलाज के लिए मोबाइल टीमों को भेजा जा रहा है। बीमारी से बचाने के लिए प्रभावित इलाकों में पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलिया बांटने के साथ ही घर घर ओआरएस घोल के पैकेट भी वितरित कराए जा रहे हैं। कंट्रोल रूम में दर्ज सूचनाओं के आधार पर बीते दस दिनों में प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा अब तक तीन हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है।
जिले में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बनी 24 बाढ़ चौकियां पर 116 स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। यह स्वास्थ्य कर्मी बाढ़ प्रभावित इलाकों से आने वाले संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण कर उन्हें दवा इत्यादि उपलब्ध करा रहे हैं। इन चौकियों पर एंटी स्नेक वेनम भी उपलब्ध कराई गयी है ताकि सांप काटे का इलाज तत्काल मुहैया हो सके। बाढ़ प्रभावित गांवों में आवागमन दुश्वार होने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों की मोबाइल टीमें मौके पर पहुंचकर मरीजों का इलाज मुहैया करा रही हैं।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मुहैया कराने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इसके लिए अलग अलग स्तर पर गठित स्वास्थ्य कर्मियों व डॉक्टरों की स्थायी व मोबाइल टीमें प्रभावित गांवों व बाढ़ चौकियों पर जाकर मरीजों के परीक्षण के साथ ही उन्हें दवा इत्यादि भी वितरित कराई जा रही है। इस दौरान गंभीर स्थिति वाले मरीजों को सीएचसी या जिला अस्पताल में लाकर भर्ती भी कराया जा रहा है।