मुजेहना विकासखंड इटियाथोक के गूंगीदेई गांव में इंदिरा आवास आवंटन में हुए फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता है कि यहां आठ बाहरी लोगों को पहले तो गांव की पात्रता सूची में शामिल किया गया। इसके बाद उन्हें एकबारगी ही इंदिरा आवास आवंटित कर दिए गए।
सपा विधायक की ओर से मामले की शिकायत ग्राम्य विकास अभिकरण में करने के बाद प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। वहीं, कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि अगर सही ढंग से जांच हुई तो इसमें कई अधिकारियों के भी फंसने के आसार हैं।
इटियाथोक की ग्राम पंचायत गूंगीदेई में वित्तीय वर्ष 2001 से लेकर 2012 तक ग्राम पंचायत की ओर से कुल 119 लोगों को इंदिरा आवास आवंटित किए गए हैं। इसमें से अकेले 88 इंदिरा आवास एक ही वित्तीय वर्ष 2008-09 में आवंटित किए गए।
वर्ष 2008-09 में जिन इंदिरा आवासों का आवंटन प्रधान व सचिव स्तर से किया गया उसमें नियम-कानून का ध्यान नहीं रखा गया। तमाम ऐसे लोगों को इंदिरा आवास आवंटित कर दिए गए, जो ग्राम पंचायत के निवासी ही नहीं हैं।
मौजूदा ग्राम प्रधान रोज अली की मानें तो वर्ष 2008-09 में जिन 88 इंदिरा आवासों का आवंटन तत्कालीन प्रधान के समय में किया गया। उसमें श्रीनगर बाबागंज, पूरेहाड़ा व गंगाभौरहा में रहने वाले आठ लोगों का नाम पहले तो ग्राम पंचायत की सूची में शामिल किया गया।
इसके बाद उन्हें इंदिरा आवास आवंटित कर दिए गए। प्रधान रोजअली की शिकायत के बाद अब पूरे मामले की शिकायत क्षेत्रीय विधायक नंदिता शुक्ला ने ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक वीरपाल से की है। इसके बाद मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है।
ग्राम पंचायत गूंगीदेई में एक ऐसा भी परिवार है, जो बीते कई वर्षों से लुधियाना में रह रहा है। इसके बावजूद उस परिवार की दो महिलाओं के नाम पात्रता सूची में शामिल करते हुए उन्हें इंदिरा आवास आवंटित कर दिए गए।
ग्राम पंचायत के निवासी व्यक्ति को ही इंदिरा आवास दिए जाने का प्राविधान है। अगर कोई व्यक्ति ग्राम पंचायत का मूल निवासी नहीं है, तो उसे इंदिरा आवास किसी भी सूरत में नहीं दिया जा सकता। यही नहीं गूंगीदेई ग्राम पंचायत की बीपीएल सूची में कुल 80 लोग शामिल हैं।
जबकि ग्राम पंचायत में अब तक 119 लोगों को इंदिरा आवास का आवंटन किया जा चुका है। वहीं, बीपीएल सूची में शामिल तमाम लोग अभी भी ऐसे हैं, जिन्हें इंदिरा आवास नहीं मिले हैं।
ग्राम पंचायत गूंगीदेई में 12 साल के अंतराल में तीन प्रधान बदले। वर्ष 2000 से 2005 तक गांव की प्रधान कमला सिंह रहीं। जबकि वर्ष 2005 से 2010 तक अनुसूचित जाति के मुक्की व वर्ष 2010 से 2012 तक यहां के प्रधान जनार्दन यादव रह चुके हैं।
वर्ष 2012 में तत्कालीन ग्राम प्रधान जनार्दन यादव के मनरेगा घोटाले में जेल जाने के बाद दो साल तक तीन सदस्यीय एक समिति ने यहां प्रधान का कामकाज देखा। जबकि हाल के कुछ महीनों में चुनाव होने के बाद अब यहां के प्रधान रोज अली हैं।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में हुई मामले की शिकायत के बाद प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया गया है। बीपीएल सूची के साथ ही गांव में इंदिरा आवास के स्थलीय सत्यापन की पूरी रिपोर्ट भी मंगाई गई है। -रामअवतार, बीडीओ इटियाथोक