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गलन बढ़ी, फसलों को खतरा

Sat, 10 Dec 2016 10:57 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
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ठंड से बचाव को बच्चे को गर्म कपड़ों में लपेटे महिला - फोटो : अमर उजाला
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लगातार ठंड बढ़ती जा रही है। शनिवार को कोहरा होने के चलते सूरज दिखाई नहीं पड़ा। धूप न निकलने से दो डिग्री सेल्सियस पारा लुढ़क कर अधिकतम 20 व न्यूनतम 10 डिग्री पहुंच गया है। दिनभर लोग ठंड से कांपते रहे। वहीं, बढ़ी ठंड और कोहरे के चलते कई फसलों के नुकसान होने का खतरा मंडराने लगा है। 
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 जिले में अब तक शनिवार सबसे अधिक ठंडा रहा। शनिवार को धूप न निकलने से लोगों को काफी परेशानी हुई। लगातार ठंड बढ़ने से फसलों में कई तरह के रोग लगने व उसकी बढ़वार प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। कई फसलों को जहां फायदा है, वहीं कई फसलों को गलन से नुकसान हो सकता है।

इस बाबत किसानों व विभागीय विशेषज्ञों की मानें तो गेहूं की फसल को ठंड से फायदा है। जबकि इस समय गलन में पाले के प्रकोप से आलू व सरसों की फसलों में झुलसा व माहू कीट के रोग के प्रकोप का खतरा है। जिले में करीब 1.60 लाख हेक्टेयर में गेहूं व 40 हजार हेक्टेयर में आलू व 40 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल की बोवाई की गई है। अधिकतम तापमान 21 डिग्री से लुढ़क कर 20 डिग्री व न्यूनतम तापमान 11 से घटकर 10 डिग्री पहुंच गया। 
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किसान तुलसी राम तिवारी व रमेश कुमार का कहना है कि इस समय जो मौसम है, इससे गेहूं की फसलों को काफी फायदा होगा। जबकि किसान राम बालक व शिवाकान्त का कहना है कि इस समय पाले का प्रकोप हल्का शुरू हुआ है इससे दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान है। अरहर में कीट का प्रकोप व आलू की फसलों में झुलसा रोग का डर है। 

उधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव हमेशा होता रहा है। यदि मौसम में अधिक बदलाव न हुआ तो मौजूदा हालत फसलों के लिए ठीक है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. उपेंद्रनाथ सिंह का कहना है कि किसान गेहूं व आलू की फसल में हल्की सिंचाई करें। गेहूं को इस मौसम से कोई नुकसान नहीं है। अरहर की फसल में किसान रासायनिक दवाओं का समय-समय पर छिड़काव करें। 
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