बलरामपुर। उम्मीद थी कि लंबित योजनाओं को बजट की खुराक मिलेगी। इससे परियोजनाएं एक बार फिर परवान चढ़ सकेंगी। बजट की कमी के कारण एक दो नहीं, 50 लाख से अधिक की लागत वालीं 89 परियाजनाएं लटकी पड़ीं हैं। ऐसे में समग्र विकास की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
पुराने आरटीओ ऑफिस के पास कलेक्ट्रेट जाने वाले मार्ग पर वर्ष 2019 में स्वीकृत दो करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से बन रहा सदभाव मंडप बजट की आस में लंबित पड़ा हुआ है। इसके लिए 70 लाख रुपये का आवंटन किया गया था। उससे सिर्फ नींव तक पिलर खड़े किए गए हैं। दूसरी किस्त को लेकर स्थिति जस की तस है। स्थानीय नागरिक रोहन, पंकज व सुमित का कहना है कि बजट की कमी के कारण काम पूरा नहीं हो सका है। लोगों को शादी-विवाह के लिए मैरेज हॉल बुक कराना पड़ता है।
15 फरवरी 2015 से स्वीकृत राजकीय महाविद्यालय गैसड़ी का निर्माण अधूरा है। जबकि बिना हैंडओवर किए ही यहां पढ़ाई शुरू करा दी गई है। 11.71 करोड़ की इस परियोजना पर अब तक 11 करोड़ 21 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। काम की जांच चल रही है। अभी मुख्य भवन में फिनिशिंग का काम कराया जाना है। सड़क का काम अधूरा पड़ा है। ब्वाॅयज हास्टल में काम कराया जाना है। शौचालय से लेकर अन्य सुविधाएं बेहाल हैं। ऐसे में छात्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीडीओ संजीव कुमार मौर्या का कहना है कि बजट की कमी के कारण लंबित परियोजनाओं को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। जैसे ही बजट रिलीज होगा, काम तेजी के साथ पूरा कराया जाएगा।