बलरामपुर। सरकार ने बजट में मोटे अनाज को लेकर विशेष प्रबंध किए हैं। जिले में मोटे अनाज को लेकर पांच ब्लॉकों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इसके लिए कृषि विभाग की टीम गांव-गांव किसानों को जागरूक करने के लिए लगाई जा रही है। पांच हजार हेक्टेयर में मोटा अनाज के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
जिले में ज्वार, बाजरा, सावां, कोदो, काकून एवं रागी मोटे अनाज में शामिल है। दो लाख 24 हजार 219 हेक्टेयर में कुल खेती होती है। रबी फसलों की बात करें तो वर्तमान में एक लाख 69 हजार 353 हेक्टेयर में गेहूं, जौ, तोरिया, राई, अलसी, चना, मसूर व मटर की खेती हो रही है। ऐसे में कृषि विभाग ने मोटे अनाज को लेकर पांच ब्लॉकों के लिए विशेष योजना बनाई है।
इसमें बलरामपुर सदर, हरैया सतघरवा, तुलसीपुर, गैसड़ी, पचपेड़वा शामिल हैं। यहां के किसानों को मोटा अनाज उत्पादन के लिए कृषि विभाग जागरूक करेगा। इसके लिए गांव-गांव टीमें भेजने का निर्णय लिया गया है। गांवों में शिविर लगाकर किसानों को मोटा अनाज उत्पादन के बारे में जानकारी दी जाएगी। बीज से लेकर उत्पादन की प्रक्रिया पर फोकस किया जाएगा। विभाग किसानों को निशुल्क बीज उपलब्ध कराएगा। इसके लिए मिनी किट का वितरण किया जाएगा।
किसानों की होगी कार्यशाला
मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए जनपदीय स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों को मोटे अनाज की खेती, विभिन्न प्रकार के उत्पाद के उपभोग व उनसे होने वाले लाभ के बारे में बताया जाएगा। जिले के बाद इसका आयोजन न्याय पंचायत स्तर पर होगा।
इनसेट स्कूलो में होगा आयोजन
मोटे अनाज की खेती को लेकर स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें छात्रों व अभिभावकों को बुलाकर उन्हें जागरूक किया जाएगा। इसके लिए समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही किसानों की एक्सपोजर विजिट कराई जाएगी।
सौ एकड़ में हो रही ओट्स की खेती
लोगों को स्वास्थ्यवर्धक व वसा मुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए जिले में इस बार सौ एकड़ खेत में ओट्स की खेती की जा रही है। कृषक उत्पादक संगठन सावित्री देवी जैव ऊर्जा प्रोड्यूस कंपनी ओट्स की खेती के लिए आगे आई है। संस्था की तरफ से अन्य किसानों को भी ओट्स की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है
बलरामपुर के सभी नौ विकास खंडों में मोटे अनाज की खेती की प्रबल संभावना है। जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर कृषक अपनी आर्थिक स्थिति में उत्तरोत्तर सुधार ला सकते हैं। हरैया सतघरवा, तुलसीपुर, गैसड़ी, बलरामपुर तथा पचपेड़वा के अधिकतर भाग वर्षा आधारित हैं व मोटे अनाज के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। कृषि विभाग इन्हीं विकास खंडों में मोटे अनाज के उत्पादन में विशेष बल दे रहा है।
- आरपी राना, जिला कृषि अधिकारी