पिछले एक दशक से समायोजन को लेकर संघर्ष कर रहे डीआरडीए के अधिकारियों व कर्मचारियों के समायोजन का आदेश तो जारी हो गया, लेकिन समायोजन पर सरकार के दांव से ये अब फिर संघर्ष करने के मूड में हैं। जारी शासनादेश में नई पेंशन नीति पर ही समायोजन की बात कही गई हैं, जबकि सभी कर्मचारी व अधिकारी वर्ष 1987 से सेवा दे रहे हैं और नई पेंशन नीति 2005 से लागू हुई है। ऐसे में डीआरडीए के अफसरों व कर्मियों ने सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मामले में सेवा काल को ध्यान में रखते हुए आदेश पारित करने की प्रार्थना की है।
इतना ही नहीं शासनादेश में जिन 15 पदों पर समायोजन की बात कही गई है, उनमेें छह पद ही प्लानिंग विभाग में सृजित नहीं हैं। ऐसे में प्रदेश के 995 अधिकारियों व कर्मचारियों को किस पद के सापेक्ष वेतन दिया जाए, इसका भी निर्धारण नहीं हो सका है। ऐसे में अधिकारी व कर्मचारी सरकार से फिर दो-दो हाथ करने की योजना बनाने लगे हैं।
वर्षों के संघर्ष के बाद डीआरडीए के अधिकारियों व कर्मचारियों को सफलता तो मिली पर अधूरी। दो माह पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की मीटिंग में डीआरडीए के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को प्लानिंग विभाग में समायोजित करने का निर्णय किया था।
इस बाबत बीती 18 जुलाई को शासनादेश जारी हुआ। इसमें जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में सीधी भर्ती से नियुक्त अधिकारियों व कर्मचारियों को ग्राम्य विकास विभाग में विलय की बात कही गई है। लेकिन शासनादेश में डीआरडीए के कार्मिकों के संवर्ग को डाइंग कैडर घोषित करते हुए नई पेंशन योजना वर्ष 2005 से आच्छादित करने तथा संविलियन के फलस्वरूप कोई भी लाभ पूर्वगामी तिथि से न दिए जाने की बात कही गई। लेकिन प्लानिंग में जिन पदों पर समायोजित करने का आदेश जारी हुआ, उसमें छह पद सृजित ही नहीं हैं।
डीआरडीए के सहायक अभियंता आरएन पांडेय व डीआरडीए इंपलाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष कामेश्वरनाथ शुक्ल का कहना है कि शासनादेश अधूरा है। मामला अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है।
मुरारी लाल बनाम स्टेट ग्राम्य विकास विभाग के नाम से चल रहे वाद में प्रदेश सरकार ने अधिकारियों व कर्मचारियों के समायोजन का आदेश दिखा कर काउंटर लगा दिया, लेकिन उसके खिलाफ कर्मचारियों व अधिकारियों ने नई पेंशन नीति पर समायोजित करने के खिलाफ आवेदन किया है।
कामेश्वरनाथ शुक्ल का कहना है कि पूरे प्रदेश में 995 अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें 1987 से नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं। ऐसे में नई पेंशन नीति के तहत समायोजित करना न्यायोचित नहीं है।
प्लानिंग विभाग में जिन 15 पदों पर समायोजित होना है, उनमें छह पद सृजित ही नहीं है। सहायक परियोजना अधिकारी, सहायक अभियंता, परियोजना अर्थशास्त्री, संख्या सहायक, अनुवेषक तकनीकी, अवर अभियंता, लेखाकार, कार्यालय अधीक्षक, ड्राफ्टमैन, सहायक लेखाकार, आशुलिपिक, कनिष्ठ लेखा लिपिक, कनिष्ठ लिपिक, वाहन चालक व चतुर्थ श्रेणी पद पर समायोजन होना है।
ग्राम्य विकास विभाग में सहायक अभियंता, परियोजना अर्थशास्त्री, संख्या सहायक, अनुवेषक तकनीकी, अवर अभियंता व ड्राफ्टमैन के पद ही नहीं हैं। ऐसे में यदि समायोजन बिना पद के कर दिया गया तो वेतन मिलना मुश्किल हो जाएगा।