गोंडा की नौवीं की छात्रा के यौन शोषण और आत्महत्या के तीन आरोपी अध्यापकों में से एक महिला शिक्षक रश्मि कपूर को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी। उसे गोंडा न छोड़ने और हर तारीख पर ट्रायल कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने दो टूक कहा कि अगर रश्मि कपूर किसी भी आदेश का पालन नहीं करती तो ट्रायल कोर्ट कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगी।
जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना की पीठ ने समक्ष पीड़ित पक्ष की ओर से सरकार एडिशनल एडवोकेट आईबी सिंह ने जमानत याचिका का विरोध किया। उनकी दलील थी कि तीन शिक्षकों आफताब अहमद, दीपक और रश्मि कपूर के बर्ताव के कारण छात्रा ने खुदकुशी जैसा कदम उठाया।
स्कूल में उसका लगातार यौन शोषण किया जा रहा था। छात्रा के पिता ने दो दफा स्कूृल प्रिंसिपल को इन शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की थी। साथ ही कक्षा में छात्रा की सीट बदलने का अनुरोध किया था। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उसकी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिम्मेदार लोगों से निराश छात्रा को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा। इतना ही नहीं पुलिस ने भी प्रिंसिपल व अन्य स्कूलीअधिकारियों को बचाने का काम किया। सुसाइड नोट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है।
‘संभव है छात्रा को पुरुष शिक्षकों के पास भिजवाती थी रश्मि’
अपने निर्णय में जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना ने कहा कि अब तक सामने आए रिकॉर्ड्स से जाहिर है शिक्षकों ने छात्रा का यौन शोषण किया। शिक्षक दीपक के छात्रा को भेजे टेक्स्ट मैसेज अदालत केसामने हैं।
दूसरी ओर रश्मि कपूर एक महिला है, उनकी भूमिका इस प्रकरण में बहुत महत्वपूर्ण नहीं नजर आती। हो सकता है वह छात्रा को आफताब और दीपक के पास केमिस्ट्री लैब में जाने के लिए मजबूर करती थी।
सुसाइड नोट, प्रिंसिपल को लिखे पत्र व अन्य साक्ष्यों के आधार पर रश्मि के मामले को दीपक व आफताब के मामले से अलग रखकर देखा जा सकता है। ऐसे में उसे बेल दी जा सकती है। इसके लिए रश्मि को दो निजी मुचलके देने होंगे जिसकी राशि ट्रायल कोर्ट तय करेगी।
लगाई यह शर्तें
- रश्मि ट्रायल कोर्ट में गवाही के लिए तय तारीखों पर रोक के लिए प्रार्थना पत्र नहीं दे सकेगी। अगर ऐसा करती है तो ट्रायल कोर्ट इसे जमानत में मिली स्वतंत्रता का गलत उपयोग करार देते हुए उसके खिलाफ उचित फैसला ले सकती है।
- कोर्ट द्वारा तय तारीखों पर रश्मि को हाजिर रहना होगा, बिना ठोस वजह अगर वह अनुपस्थित होती है तो उसे एक वर्ष के कारावास की सजा दी जा सकती है और जमानत राशि जब्त की जा सकती है।
- रश्मि को केस शुरू होने, चार्ज फ्रेम होने और बयान दर्ज होने के लिए तय तारीखों पर व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहना होगा, वह ऐसा नहीं करती है तो ट्रायल कोर्ट उस पर वाजिब कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
- केस पूरा होने तक रश्मि गोंडा से बाहर नहीं जा सकती। साथ वह मृत छात्रा के स्कूल में प्रवेश नहीं करेगी।
स्कूल ध्यान रखें कैसे शिक्षक नियुक्त कर रहे हैं : जस्टिस सक्सेना
जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना ने कहा कि स्कूल ऐसी जगह हैं जहां विद्यार्थियों को नैतिकता और संस्कार का पाठ पढ़ाया जाता है। ऐसी जगह नहीं जहां शिक्षक अनैतिक काम करें, बच्चों का यौन शोषण करें।
शिक्षक ऐसा करने लगेंगे तो बच्चों, समाज और देश का भविष्य कैसा होगा। ऐसे शिक्षक किसी सहानुभूति के योग्य नहीं हैं। स्कूलों के प्रबंधन को शिक्षकों की नियुक्ति के समय ध्यान रखना चाहिए कि वे किस तरह के लोगों को नियुक्ति दे रहे हैं।