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एक हजार बीघा सरकारी जमीन पर अवैध पट्टा आवंटित, नोटिस जारी

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करनैलगंज (गोंडा)। तहसील क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों में करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि के घोटाले को मंडलायुक्त ने गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है। मामले की जांच एसडीएम द्वारा पूरी करने के बाद पट्टाधारकों को नोटिस जारी किया गया है। कमिश्नर ने तहसील के अभिलेखों को तलब किया है जिससे सरकारी जमीन के अवैध कब्जेदारों में खलबली मच गई है।
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करनैलगंज में तहसील की स्थापना के समय पुरानी तहसील तरबगंज से अभिलेखों के स्थानांतरण में हेराफेरी कराकर फायदा उठाते हुए भू-माफिया ने करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि का अभिलेखों में नाम दर्ज करा लिया था। राजस्व ग्राम लालेमऊ एवं बसेरिया में सरकारी भूमि बंजर, नवीन परती, जलमग्न, खलिहान, ग्राम समाज के खातों में दर्ज भूमि को पट्टा दिखाकर नामांतरण बही एवं पट्टा प्रमाण रजिस्टर में बिना दर्ज हुए खातेदारों के नाम भूमि दर्ज है।
इसका प्रमाण उस समय मिला जब दिसंबर 2016 में तत्कालीन एसडीएम हरिशंकर लाल शुक्ल को एक गोपनीय प्रार्थना पत्र मिला जिसमें पुराने अभिलेखों की नकल एवं खतौनी में दर्ज नामों की सूची मिली। यही नहीं भूमि को पट्टा दिखाकर नाम से दर्ज किए जाने की सूचना के साथ ही गांव या जिले के बाहर रहने वाले कुछ लोगों के नाम भी भूमि दर्ज होने की शिकायत मिली जिसमें जिले व प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों के साथ ही सरकारी नौकरी करने वाले करीब दो दर्जन लोग शामिल हैं।
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एसडीएम ने इतने समय से भूमि के घोटाले को समझने के लिए कुछ भूमिधरी खाताधारकों के नाम के खातों को खंगालना शुरू कराया तो किसी भी पुराने अभिलेखों में इसकी पुष्टि नहीं हुई। भूमि एक हजार बीघे से अधिक होने का अनुमान है जिसके लिए गोंडा अभिलेखागार से कुछ पुराने अभिलेख खंगाले गये तो पट्टा संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद अक्तूबर 2017 में तहसीलदार ने भूमि पर काबिज 113 लोगों को नोटिस भेजा जिसमें ग्राम लालेमऊ के लोग ही शामिल हैं।
बसेरिया के भूमि घोटाले की जांच अभी ठंडे बस्ते में है। नोटिस जारी होने के बाद तहसील प्रशासन ने फिर इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया। इन अवैध पट्टों को निरस्त करने व अवैध रूप से काबिज लोगों को बेदखल करने की कार्रवाई में प्रशासन हीलाहवाली करता रहा। करीब एक दर्जन फर्जी पट्टेदारों के ऐसे नाम भी शामिल हैं जिस नाम का कोई व्यक्ति गांव का निवासी नहीं है। मामले में 2017 में तत्कालीन तहसीलदार राम नारायन वर्मा ने 1994 के एक पट्टेदार को मिले पट्टे का उदाहरण देते हुए सभी अवैध पट्टेदारों का पट्टा वैध करार दे दिया जिसकी शिकायत एक व्यक्ति द्वारा गोपनीय तरीके से तहसील दिवस में आयुक्त देवी पाटन मंडल से की गई तो तत्कालीन आयुक्त सुधेश कुमार ओझा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को जांच करने के निर्देश दिए थे तथा पूरी पत्रावली तलब की थी। अब आयुक्त देवीपाटन महेंद्र कुमार ने मामले को न्यायिक प्रक्रिया में लाकर नोटिस जारी किया है। एक बार फिर पट्टाधारकों को नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया है।
फर्जी तरीके से सरकारी भूमि को नाम से दर्ज कराने के मामले की जानकारी हुई है। सभी भूमिधरों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत नोटिस देकर उनसे पटटा संबंधी अभिलेख तलब किया जाएगा। यदि प्रमाण नहीं मिला तो सभी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की जाऐगी तथा पट्टा निरस्त कराया जायेगा। -ज्ञानचंद गुप्ता, एसडीएम
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