गोंडा। मतदान ड्यूटी के नदारद रहने वाले आठ प्रधानाध्यापक, 65 सहायक अध्यापक और 59 शिक्षामित्र समेत 29 विभागों के 234 कर्मियों के खिलाफ तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज होगी। कार्मिक प्रभारी/सीडीओ के अनुमोदन के बाद इसकी अनुमति जिलाधिकारी स्तर से जारी कर दी गई है। लापरवाही बरतने वाले विभागाध्यक्षों पर भी एफआईआर के आदेश दिए गए हैं।
पांचवें चरण में 20 मई को मतदान कराने के लिए एलबीएस पीजी कॉलेज परिसर से 19 मई को पोलिंग पार्टियां रवाना की गई थीं। प्रधानाध्यापक, शिक्षक, प्रवक्ता, अनुदेशक, शिक्षामित्र, राज्य कर अधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, फार्मासिस्ट, बायोलोजिस्ट, प्रधान सहायक, सहायक राजस्व निरीक्षक, अनुचर, रोजगार सेवक, मेट, सफाईकर्मी और क्लीनर समेत 234 कर्मचारी बिना किसी सूचना के चुनाव ड्यूटी से नदारद रहे। आखिरी वक्त में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक, पशुचिकित्सा, मंड़ी, अल्पसंख्यक, राज्यकर, समाज कल्याण, पंचायती राज, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग समेत 29 कार्यालयों के 234 कर्मचारियों ने ड्यूटी रिसीव नहीं की। कार्मिक प्रभारी को पोलिंग पार्टियां रवाना करने से पहले घंटों मशक्कत करनी पड़ी।
रिजर्व कर्मियों को भेजकर वोटिंग कराई गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम नेहा शर्मा ने 29 कार्यालयों के विभागाध्यक्षों को तीन दिन के भीतर लोक प्रतिनिधित्व की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया। अगर तीन दिन में एफआईआर कराने के बाद कार्मिक प्रभारी को सूचित नहीं किया तो संबंधित विभागाध्यक्षों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
चुनाव ड्यूटी से नदारद कर्मियों में कई जनप्रतिनिधियों के भाई व निकट संबंधी बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इसी के चलते पूर्व में अधिकारियों की ओर से सख्ती बेअसर रही है। विभागाध्यक्ष कार्रवाई से बच रहे हैं। मिलीभगत कर लीपापोती की आशंकाएं हैं। आरोप है कि रसूख के दम पर तमाम कर्मचारी आखिरी समय तक प्रशासन को चकमा देते रहे। चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी प्रशासन को सूचना देना तक मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में कार्मिक प्रभारी व सीडीओ एम. अरुन्मोली ने सख्ती दिखाई है।