गोंडा। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले किडनी व न्यूरो की परेशानी से पीड़ित मरीजों को भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट व न्यूरो सर्जन का पद स्वीकृत न होने से मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ तक की दौड़ लगाना पड़ती है।
अनियमित खानपान व बिगड़ी लाइफ स्टाइल के कारण जिले में किडनी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर दिन करीब 500 मरीज किडनी फेल होने के कारण जिला अस्पताल व अन्य निजी अस्पतालों में डायलसिस करवाना पड़ती है। ऐसे में जिला अस्पताल में किसी भी नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को किसी भी तरह के चिकित्सकीय परामर्श व इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेने को लखनऊ तक की दौड़ना पड़ता है। लगातार मांग के बाद भी जिला अस्पताल में साठ साल बाद भी अभी तक नेफ्रोलॉजिस्ट व न्यूरो सर्जन का पद तक स्वीकृत नहीं हुआ है।
जिला अस्पताल में डायलसिस करवाने आए तरबगंज निवासी पुनीत ने बताया कि उन्हें तीन बार लखनऊ का चक्कर लगाने के बाद डायलसिस करवाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर का परामर्श मिल सका। ओमप्रकाश ने भी अस्पताल में किडनी का डॉक्टर न होने के कारण इलाज में हो रही परेशानी के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें किसी भी तरह के डॉक्टरी परामर्श के लिए लखनऊ जाना पड़ता है। कमोबेश ऐसी ही कुछ स्थिति सिर, मस्तिष्क अथवा तंत्रिका तंत्र में होने वाली परेशानी से पीड़त मरीजों को भी उठाना पड़ती है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन औसतन 50 के करीब आने वाले ऐसे मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर रिफर करना पड़ता है।
निजी अस्पतालों में भी कोई नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं
जिला अस्पताल के साथ ही शहर में संचालित आधा दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों में भी मरीजों को डायलसिस की सुविधा तो मिल जाती है लेकिन परामर्श के लिए कोई विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं मिलता है। सरकारी अस्पतालों की तरह निजी में भी कोई नेफ्रोलॉजिस्ट चिकित्सक तैनात नहीं है। ऐसे में मरीजों का डायलसिस सामान्य फिजिशियन के सुझाव पर ही करना पड़ता है।
किडनी फेल होने के कारण
जिला अस्पताल के वरिष्ट परामर्शदाता डॉ कुलदीप पांडेय ने बताया कि ड्रग्स व शराब का अधिक सेवन करने, किडनी में स्टोन होने, प्रोस्टेट बढ़ जाने, यूरीनरी ट्रैक्ट में रक्त का थक्का बन जाने, शुगर की मात्रा अधिक होने तथा ब्लेडर कंट्रोल करने वाली नसों के कमजोर हो जाने की स्थिति में किडनी फेल की परेशानी होती है।
किडनी फेल होने के लक्षण
रात के समय सामान्य से ज्यादा पेशाब आना।
खून की कमी होना।
सोकर उठने के बाद आंखों के चारों तरफ व चेहरे पर सूजन होना।
लगातार कमजोरी होना व वजन कम होना।
स्त्रियों में मासिक धर्म की अनियमितता व पुरुषों में नपुंसकता होना।
जिले में डॉक्टरों की स्थित
अस्पताल सृजित पद नियुक्ति
जिला अस्पताल 44 20
सीएमओ अधीन 178 99