छप्पर के नीचे रहने को मजबूर बाढ़ पीड़ित।
गोंडा। मानसून की दस्तक के साथ ही सरयू नदी के किनारे बसे गांवों और मजरों के लोगों को आशियाना उजड़ने की चिंता सताने लगती है। नवाबगंज, तरबगंज और करनैलगंज तहसील के बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए बरसात राहत नहीं, बल्कि विस्थापन, नुकसान और अनिश्चित भविष्य की आशंका लेकर आती है। हर साल बाढ़ और कटान से घर, खेत और आशियाने उजड़ते हैं, लेकिन पानी उतरने के बाद पीड़ितों का हाल पूछने वाला कोई नहीं होता। बाढ़ के दौरान तो प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक वादों की झड़ी लगा देते हैं लेकिन पानी उतरते ही सभी भूल जाते हैं।
इसी कारण नवाबगंज क्षेत्र के दत्तनगर, साकीपुर, व्योन्दा माझा और तुलसीपुर माझा समेत कई गांवों के लोग बरसात शुरू होते ही पलायन की तैयारी करने लगते हैं। साकीपुर के चहलावा, शुक्लपुरवा और अठाइसा जैसे मजरे हर वर्ष बाढ़ और कटान की मार झेलते हैं। बाढ़ आने पर संपर्क मार्ग पूरी तरह कट जाने से लोगों को सड़क किनारे या ऊंचे स्थानों पर शरण लेना पड़ती है। दत्तनगर के राजाराम बताते हैं कि बाढ़ और कटान में घर-खेत गंवाने वाले लोगों को मुआवजा और सरकारी सहायता भी समय पर नहीं मिल पाती। रामकुमार, रामचंदर और राममिलन जैसे कई परिवार घर और खेत गंवाकर विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं।
उधर, उमरी बेगमगंज क्षेत्र में ऐली परसौली, केवटाही, गाड़ियाना, दिव्हार थान, तेलमोहन पुरवा, हरिशंकर पुरवा, नौबस्तन पुरवा, शंभू सिंह पुरवा और घरूकन पुरवा समेत करीब 20 से 30 मजरों की आबादी भी बरसात की दस्तक से परेशान होने लगती है। ऐली परसौली निवासी विंध्या यादव बताते हैं कि हर साल परिवार को घर छोड़कर बंधे पर तिरपाल डालकर रहना पड़ता है। फसलें नष्ट हो जाती हैं, पशुओं को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। बाढ़ उतरने के बाद घरों की सफाई, मरम्मत और खेती दोबारा शुरू करने में महीनों लग जाते हैं।
तटबंधों को मजबूत करने में जुटा विभाग
सिंचाई एवं बाढ़ खंड विभाग ने एल्गिन-चरसड़ी तटबंध की सुरक्षा के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग लगभग 7.34 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर काम करा रहा है। कटान रोकने के लिए तीन कतारों में काम किया जा रहा है। स्थायी शिविर निर्माण का भी प्रावधान किया गया है। एसडीएम करनैलगंज नेहा मिश्रा ने बताया कि संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है तथा बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी संसाधनों को तैयार रखा गया है।