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Gonda News: ज्योति विद्या मंदिर मामले में अब 31 को होगी सुनवाई

Mon, 24 Aug 2026 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। करीब 29 वर्ष से न्यायालय में लंबित ज्योति विद्या मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई सोमवार को हुई। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख नियत की है। यह मामला मंडलायुक्त द्वारा सिविल जज को फोन किए जाने के बाद सुर्खियों में आया है।
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ज्योति विद्या मंदिर से जुड़ा विवाद वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित है। तत्कालीन सिविल जज शबीना खातून ने जिला जज को पत्र भेजकर मंडलायुक्त की ओर से फोन किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद जिला जज दुर्ग नरायन सिंह ने मामले को दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था। इसी न्यायालय में सोमवार को सुनवाई हुई और अगली तारीख 31 अगस्त निर्धारित की गई।
हाईकोर्ट की नाराजगी बनी चर्चा का विषय
सिविल जज को फोन किए जाने के मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सोमवार को कचहरी परिसर में अधिवक्ता इस पूरे घटनाक्रम पर चर्चा करते नजर आए। सिविल बार एसोसिएशन के मंत्री गौरीशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि यदि कोई मुकदमा लंबे समय से लंबित है तो उसके शीघ्र निस्तारण के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाए जाने चाहिए। किसी न्यायिक अधिकारी से फोन पर संपर्क करना उचित प्रक्रिया नहीं है।
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सूचना विभाग ने रखा मंडलायुक्त का पक्ष
सूचना विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। विज्ञप्ति के अनुसार मामला करीब 1997 से लंबित है और अत्यंत मूल्यवान सरकारी नजूल भूमि से संबंधित है। उपलब्ध अभिलेखों के मुताबिक, वर्ष 1985 में पट्टा निरस्त होने के बाद भूमि सरकार के नाम दर्ज है, जबकि वर्ष 2008 से इस पर बिना विधिक प्रपत्र के साधारण कागज के आधार पर कथित पट्टा दर्शाए जाने की बात सामने आई है। इसी भूमि पर निजी विद्यालय संचालित होने की भी जानकारी दी गई है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि मंडलायुक्त ने पदभार ग्रहण करने के बाद पुराने मामले की जानकारी मिलने पर सरकारी भूमि के संरक्षण और सरकार की ओर से लंबित वाद में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जानकारी हासिल की थी। संबंधित पीठासीन अधिकारी के अवकाश से लौटने की स्थिति स्पष्ट न होने पर उन्होंने केवल यह जानने के लिए फोन किया था कि वह कब लौट रही हैं।
विज्ञप्ति के मुताबिक, फोन पर न तो वाद के गुण-दोष पर चर्चा हुई, न किसी आदेश अथवा निर्णय को लेकर बात हुई और न ही वाद संख्या या नाम का उल्लेख किया गया। यह भी कहा गया है कि पीठासीन अधिकारी के पत्र में वाद का नाम अथवा संख्या लेकर बातचीत किए जाने का उल्लेख नहीं है।
विज्ञप्ति में पीठासीन अधिकारी के पत्र में मंडलायुक्त की सेवा अवधि के संबंध में किए गए उल्लेख को भी तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि मंडलायुक्त न्याय पालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का पूर्ण सम्मान करती हैं और उनका उद्देश्य केवल लंबे समय से लंबित सरकारी भूमि से जुड़े मामले की प्रशासनिक स्थिति जानना तथा सरकारी हित में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था।
अमिताभ ठाकुर ने की स्थानांतरण और जांच की मांग
दूसरी ओर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मंडलायुक्त के स्थानांतरण की मांग की है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की है।
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