गोंडा। कोलकाता की घटना के विरोध में चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त होने से 10 दिन बाद शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौटीं। आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने ओपीडी व वार्डों में ड्यूटी शुरू कर दी। पूर्व की भांति सुबह आठ बजे से वरिष्ठ परामर्शदाताओं के साथ जूनियर व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर उपचार शुरू किया।
मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार सुबह ही पर्चा काउंटर से ओपीडी तक मरीजों की लंबी लाइन लग गई। जिन जूनियर व सीनियर रेजिडेंट की वार्डों में ड्यूटी लगाई गई थी, वह भी मरीजों के उपचार में जुटे रहे। शुक्रवार को 1,346 नए व पुराने मरीजों का उपचार हुआ। इटियाथोक की परासराय निवासी आयुष ने बताया कि उनकी मां को आंख का उपचार कराना था, लेकिन हड़ताल की वजह से दो दिन लौटना पड़ा था। आज आंख की जांच व दवाएं मिल पाईं।
सुरक्षा की मांग कर रहे डॉक्टरों का दर्द अभी भी बरकरार है। महिला डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में आवास दिलाने की प्रमुखता से मांग की थी, वहीं अस्पताल में पुलिस चौकी बनाने की मांग पर भी अब तक कोई विचार नहीं किया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे डॉ. मिथलेश ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उनकी किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। लेकिन मरीजों की परेशानी को देखते हुए आंदोलन खत्म किया गया है।