बालपुर। नरायनपुर मर्दन गांव में रविवार रात हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। भारत व न्यूजीलैंड का टी-20 फाइनल मैच देख रहे स्नातक के छात्र ने बाबा की डांट से आहत होकर फंदे से लटककर जान दे दी।
नरायनपुर मर्दन गांव निवासी अमरीश चौबे का पुत्र मोहित चौबे (23) रविवार रात मोबाइल फोन पर टी-20 क्रिकेट का फाइनल मैच देख रहा था। इसी दौरान मोहित के बाबा जगदीश प्रसाद चौबे उर्फ सांवली ने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहते हुए डांटा और मोबाइल फोन लेकर अपने पास रख लिया। बताया जाता है कि इस बात से मोहित आहत हो गया। वह बिना कुछ कहे घर की पहली मंजिल पर चला गया, जहां निर्माण कार्य के लिए शटरिंग लगी है। वहीं पर मोहित ने गमछे से शटरिंग में फंदा बांधकर फांसी लगा ली।
काफी देर तक मोहित घर में दिखाई नहीं दिया तो परिजनों को चिंता हुई और उसकी तलाश शुरू की गई। जब परिजन पहली मंजिल पर पहुंचे तो मोहित को फंदे से लटका देख चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन उसे फंदे से उतारकर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
अमरीश चौबे ने बताया कि मोहित लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज में बीएससी एजी द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह कुछ दिनों से बीमार था। उसका इलाज कराया जा रहा था। रविवार को परिवार के कई सदस्य भारत-न्यूजीलैंड का टी-20 फाइनल मैच रहे थे। इसी दौरान यह दुखद घटना हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल शमशेर सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।
घर में मचा कोहराम
मोहित तीन भाइयों में छोटा था। बड़े भाई त्रिशूलधारी और गदाधारी हैं। बेटे की मौत से मां ननका देवी और पिता अमरीश का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता बताते हैं कि माेहित पढ़ाई में अच्छा था। बेटे की मौत की सूचना पर रिश्तेदार व संबंधियों ने पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की।
बच्चों से संवाद बहुत जरूरी
मेडिकल कॉलेज में किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के परामर्शदाता दिलीप शुक्ल का कहना है कि युवाओं में छोटी-छोटी बातों को लेकर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में परिवार का व्यवहार और संवाद बेहद अहम है। बच्चों व युवाओं से खुलकर बातचीत करें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। पढ़ाई या किसी गलती पर अत्यधिक दबाव या कठोर शब्दों से बचें। अगर बच्चा चुप-चुप रहने लगे या तनाव में दिखे तो तुरंत परामर्श और सहयोग दें। परिवार में सकारात्मक माहौल और भावनात्मक सहयोग बनाए रखें। समय रहते संवाद व सहयोग मिलने से कई दुखद घटनाओं को टाला जा सकता है।