इटियाथोक में दही बड़ा बनाता कारीगर व गोंडा की कचाैड़ी। संवाद
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गोंडा। जिले के दही बड़ा के साथ ही अब कचौड़ी को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। एक जनपद एक उत्पाद की तर्ज पर एक जनपद एक व्यंजन के तहत दही बड़ा के बाद अब कचौड़ी का भी चयन किया गया है। जिला उद्योग विभाग संबंधित कारीगरों को निशुल्क प्रशिक्षण के साथ ही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक में जरूरी मदद करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि इटियाथोक का दही बड़ा खाने के लिए जिलेभर के साथ ही बाहर से भी लोग आते हैं। मैदे व आटे की कचौड़ी भी लोगों को खूब भा रही है। गोंडा मुख्यालय से लेकर इटियाथोक व अन्य क्षेत्रों में कारीगर कचौड़ी बनाते हैं। मसालेदार दाल, मटर या आलू भरकर कचौड़ी को तेल में तलकर तैयार किया जाता है। पारंपरिक होने के साथ ही लोग नाश्ते में भी कचौड़ी को खूब पसंद करते हैं।
जिला उद्योग उपायुक्त बाबूराम ने बताया कि गोंडा पहले अवध क्षेत्र के प्रभाव में रहा है। जहां मसालेदार और घी आधारित व्यंजन लोकप्रिय हैं। इसी परंपरा से खस्ता कचौड़ी का विकास हुआ है। गोंडा में कचौड़ी अपने विशिष्ट स्वाद व विशेष प्रकार की उड़द दाल एवं रेसिपी के कारण बिल्कुल अलग है। पारंपरिक अवसरों व त्योहारों पर घरों में इसे प्रमुख व्यंजन के रूप में बनाया जाता है। गोंडा की कचौड़ी में हींग, धनिया और दाल की भराई का पारंपरिक उपयोग स्थानीय कृषि और मसालों की संस्कृति को भी दर्शाता है।
400 से अधिक कारीगर कर रहे जीवनयापन
अधिकारियों ने बताया कि जिले में 100 से अधिक छोटी व बड़ी इकाइयां क्रियाशील हैं। इनमें चार सौ से अधिक कारीगर जीवन यापन कर रहे हैं। संपूर्ण वर्ष में कचौड़ी का स्वाद लिया जा सकता है। हालांकि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखना, कम शेल्फ लाइफ, कुशल कारीगरों की कमी और प्रतिस्पर्धा अभी भी चुनौती बनी हुई है।
1988 में खोली थी छोटी सी दुकान
इटियाथोक। केशव राम शुक्ल ने 1988 में थाने के पास छोटी सी दुकान खोलकर शुरुआत की थी। केशव राम ने बताया कि अब बेटा कृपाशंकर शुक्ल दुकान संभालता है। यहां दूध से ताजा दही तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल दुकान पर होता है। उड़द की दाल को अच्छी तरह धोकर और पीसकर दही बड़े बनाए जाते हैं। इन बड़ों की खास बात यह है कि इनके अंदर ड्राई फ्रूट्स डालकर बढ़िया स्वाद बना देते हैं। मसालों के साथ इसे ग्राहकों को परोसा जाता है। शिक्षक अनिल कुमार ने बताया कि इटियाथोक का दही बड़ा उन्हें व परिजनों को बेहद पसंद है। वह अक्सर दही बड़ा का स्वाद लेने इटियाथोक पहुंचते हैं।