गोंडा। मत्स्य उत्पादन में तेज वृद्धि के मामले में देवीपाटन मंडल के चार जिलों में गोंडा अव्वल स्थान पर है। एक ही वर्ष में पांच हजार टन से ज्यादा मछली उत्पादन कर यह उपलब्धि प्राप्त की है। वहीं, समग्र उत्पादन की बात की जाए तो अभी तक बहराइच जिला मामूली बढ़त के साथ पहले पायदान पर है।
जिले में मत्स्य पालन के प्रति लोगों की रुचि ने स्वरोजगार का विकल्प दिया है। स्थिति यह है कि करीब 2,400 लोगों ने मछली पालन के लिए तालाब का पट्टा लिया है। इसमें से 1,632 लोग मत्स्य पालन का कार्य कर रहे हैं। जिसमें छोटे व बड़े सभी तालाब और टैंक शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिले में 15,545.90 टन मत्स्य उत्पादन हुआ था, जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में 20,419.60 टन उत्पादन दर्ज किया गया।
इस तरह कुल 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी साल भर में हुई है। वहीं, बलरामपुर दो प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 13,981.80 टन उत्पादन कर दूसरे नंबर, 30,064.85 टन उत्पादन के साथ बहराइच शून्य फीसदी बढ़ोतरी के बाद तीसरे नंबर पर तो श्रावस्ती जिले में 16,855 टन से घटकर 2,382 टन पर पहुंच गया है। इस तरह माइनस 86 प्रतिशत की कमी बहराइच में दर्ज की गई है।
मनकापुर, सदर बेहतर तो तरबगंज में विशेष प्रयास
गोंडा जिले में मत्स्य उत्पादन की बात की जाय तो मनकापुर व सदर तहसील में बेहतर कार्य हो रहा है। वहीं, बेलसर व तरबगंज आदि में उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही जिला समग्र मत्स्य उत्पादन के मामले में मंडल में पहले पायदान पर पहुंच जाएगा।
- इंद्रजीत, कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य विभाग