गोंडा के इंडियन ऑयल डिपो के बाहर खड़ा नेपाल आयल निगम का टैंकर। - संवाद
गोंडा। नेपाल की हिंसा गोंडा की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। सीमा पर डीजल व पेट्रोल से भरे 67 टैंकर फंसे हैं। इस कारण गोंडा डिपो से पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात करीब ठप हो गया है। इसके अतिरिक्त नेपाल को भेजे गए गेहूं, चावल व मक्का भरे 50 ट्रक रास्ते में फंसे हैं। इससे अब तक करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
मंडल मुख्यालय पर इंडियन ऑयल का डिपो है। यहां से प्रतिदिन नेपाल ऑयल निगम के टैंकर के माध्यम से नेपाल को डीजल व पेट्रोल भेजा जाता है। मंगलवार से नेपाल को होने वाली आपूर्ति ठप है। अधिकारियों के अनुसार यहां से डीजल व पेट्रोल लेकर नेपाल के लिए निकले करीब 67 टैंकर रास्ते में ही फंसे हुए हैं। इसका असर यहां की निर्यात व्यवस्था पर पड़ रहा है। इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड के डीजीएम कारपोरेट कम्युनिकेशन मनोज कुमार का कहना है कि प्रकरण जानकारी में है। स्थिति सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।
क्या बताएं, हम तो पांच दिन से यहीं फंसे हैं
इंडियन ऑयल डिपो पर टैंकर के साथ खड़े नेपाल के कैलाली निवासी भागीराम ने बताया कि रविवार से यहीं पर हैं। तीन दिन तक सारे संपर्क कटे हुए थे। घरवालों से बात नहीं हो पा रही थी। अब जाकर स्थिति कुछ सामान्य हुई है। परिजनों से बात हुई है। माहौल धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।
सता रही कारोबार की चिंता
गल्ला मंडी में बृहस्पतिवार को गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष विकास जैन व्यापारियों के साथ नेपाल मामले पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि नेपाल में हिंसा से पहले यहां से सामान लेकर गए वाहन रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रक ड्राइवर फोन करके पैसे मांग रहे हैं। यहां से पैसा भेजा जा रहा है। सीमा सील होने से नया कोई ऑर्डर तक नहीं मिल पा रहा है। अब तक करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। सचिन गर्ग, मनीष खेतान भी नेपाल के हालात से चिंतित दिखे।
नेपाल में बिगड़े हालात से रोडवेज की कमाई घटी
नेपाल की हिंसा का असर रोडवेज की कमाई पर भी पड़ा है। देवीपाटन के चारों जिलों के लोगों का नेपाल आना-जाना होता है। नेपाल से भी औसतन प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार लोग ट्रेन, टैक्सी व रोडवेज बसों से यहां आते हैं। देवीपाटन के चारों डिपो की बसों से प्रतिदिन 39, 000 हजार लोग यात्रा करते थे। तीन दिन पहले आठ सितंबर से बहराइच के रुपईडीहा व बलरामपुर के बढ़नी बॉर्डर पर सख्ती बढ़ने से नेपाल से लोग नहीं आ रहे हैं। इससे रोडवेज को प्रतिदिन 12 हजार रुपये का राजस्व प्रभावित हो रहा है। पिछले चार दिनों में 48 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक अरविंद कुमार ने बताया कि नेपाल में हिंसा के कारण यात्री कम हो गए हैं।