लखनऊ। शिक्षकों के अवकाश स्वीकृति में रिश्वत लेने के आरोप में गोंडा जिले के झंझरी ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी जैनेंद्र कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने एबीएसए गुप्ता के खिलाफ डायट प्राचार्य बलरामपुर को जांच सौंपी गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय भी डायट बलरामपुर किया गया है।
शासन को प्राप्त शिकायतों के आधार पर अधिकारियों ने माना कि एबीएसए गुप्ता के कारण विभाग की छवि धूमिल हुई है। गुप्ता को प्रथम दृष्टया शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही करने, शिक्षकों और शिक्षिकाओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने और रिश्वत की मांग करने का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है।
केस -1 : झंझरी ब्लॉक के डड़वा कानूनगो विद्यालय में कार्यरत सहायक अध्यापिका अंजली चौरसिया ने 28 दिसंबर को छुट्टी के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया था। आरोप है कि अवकाश स्वीकृति के लिए एबीएसए ने अंजली से रिश्वत मांगी। जब रिश्वत नहीं मिली तो प्रार्थना पत्र संस्तुति के साथ अग्रसारित नहीं किया। इससे आहत शिक्षिका के पति प्रवीण कुमार ने गोंडा में बीएसए दफ्तर में प्रदर्शन और हंगामा किया। इस पर बीएसए ने प्रवीण कुमार को पहले ही निलंबित कर दिया। प्रवीण कुमार भी कटरा बाजार के खैरम ललुआ चक के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं।
केस -2 झंझरी के पथवलिया में कार्यरत शिक्षिका अनुपम मिश्रा ने 27 नवंबर को सीसीएल के लिए पोर्टल पर आवेदन किया था। स्कूल में दस अध्यापिकाएं कार्यरत होने के बावजूद एबीएसए गुप्ता ने आवेदन अस्वीकृत कर दिया। 4 दिसंबर को अनुपम ने फिर आवेदन किया। अवकाश नहीं मिलने पर उन्होंने 26 दिसंबर को 17 महीने की बीमार बेटी की देखभाल के लिए फिर आवेदन दिया, पर अस्वीकृत हो गया।
महासंघ ने भी किया था आंदोलन
उधर, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने एबीएसए गुप्ता पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें निलंबित करने की मांग की थी। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने सरकार को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि एबीएसए गुप्ता सीसीएल और प्रसूति अवकाश स्वीकृत करने की एवज में रिश्वत की मांग करते हैं। संघ ने आरोप लगाया कि एबीएसए रिश्वत मिलने पर संबंधित शिक्षक या कर्मचारी की उपस्थिति रजिस्टर में तो अवकाश दर्ज करते हैं लेकिन सेवा पुस्तिका में अवकाश दर्ज नहीं करते हैं।